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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, रिजॉर्ट के नीले-नीले पानी की ‘चमकदार सच्चाई’ उजागर

 

कभी आपने किसी रिजॉर्ट में जाते ही नीले-नीले पानी वाले तालाब या स्विमिंग पूल को देखकर कहा होगा, “वाह! क्या नेचुरल खूबसूरती है।” ठंडा, साफ और एकदम इंस्टाग्राम वाला पानी देखकर मन खुश हो जाता है, और लोग तुरंत अपने मोबाइल निकालकर फोटो या वीडियो बनाने लगते हैं। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस अनुभव की चमकदार सच्चाई सामने ला दी है।

वीडियो में दिखाया गया है कि जिस नीले पानी को देखकर रिजॉर्ट में लोग वाह-वाह कर रहे थे, वह वास्तव में प्राकृतिक नहीं, बल्कि कैमरे और एडिटिंग की चालाकी से ऐसा दिखाया गया था। वीडियो में देखा जा सकता है कि असल तालाब का पानी इतना नीला नहीं था जितना सोशल मीडिया पर दिखाई देता है। कैमरे के एंगल, रंग सुधार और विशेष फिल्टर का इस्तेमाल करके पानी को गहरा और आकर्षक नीला दिखाया गया।

सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को देखकर हैरान रह गए हैं। कई लोगों ने लिखा कि “अब तो आंखों पर भरोसा करना भी मुश्किल हो गया” और “सोशल मीडिया पर दिखने वाली चीज़ें हमेशा सच नहीं होतीं।” वीडियो में साफ-साफ दिखाया गया कि रिजॉर्ट की इंस्टाग्रामेबल तस्वीरें और वीडियो अक्सर वास्तविकता से अलग होती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर नीले-नीले पानी और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों को ज्यादा आकर्षक दिखाने के लिए अक्सर रंग सुधार (color grading) और फिल्टर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल दर्शकों को आकर्षित करना और रिसोर्ट का प्रचार करना होता है, लेकिन इसके कारण कभी-कभी भ्रम भी पैदा होता है।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग मजेदार और हैरान प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने लिखा कि यह “इंस्टाग्राम का जादू” है, जबकि कई लोग इसे “नकली लेकिन मजेदार” मान रहे हैं। वहीं कुछ लोग इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कह रहे हैं कि पर्यटन स्थल और होटल की मार्केटिंग में झूठी तस्वीरें और वीडियो दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जिसे देखने वाले लोगों को समझना चाहिए।

इस घटना ने यह साबित किया कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली चीज़ें हमेशा वास्तविक नहीं होतीं। लोग अक्सर अपनी पोस्ट और वीडियो को आकर्षक दिखाने के लिए एडिटिंग का सहारा लेते हैं, और रिजॉर्ट या पर्यटन स्थल भी यही रणनीति अपनाते हैं। वायरल वीडियो ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि नेचुरल सुंदरता को देखकर रोमांचित होना अच्छा है, लेकिन सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही तस्वीरों और वीडियो पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए।

सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी नोट किया कि वीडियो देखने के बाद अब लोग रिजॉर्ट या तालाब के असली रंग और अनुभव के लिए ज्यादा सतर्क हो जाएंगे। कई लोगों ने लिखा कि “अब फोटो देखकर नहीं, खुद जाकर देखेंगे कि असली में पानी कैसा है।”

अंततः यह वायरल वीडियो केवल मनोरंजन ही नहीं कर रहा है, बल्कि सोशल मीडिया पर सच और दिखावे के बीच का फर्क भी समझा रहा है। नीले-नीले पानी का यह मामला दर्शकों को यह याद दिलाता है कि कभी-कभी चीजें आंखों को धोखा दे सकती हैं, और असली अनुभव का आनंद लेने के लिए खुद मौके पर जाना ही सबसे सही तरीका है।