वीएचपी नेता विनोद बंसल ने कांग्रेस पर साधा निशाना, जामिया-जेएनयू विवाद को बताया बदनाम करने की साजिश
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी और जामिया मिलिया इस्लामिया व जेएनयू में लगे विवादित नारों को लेकर विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति को हिंदू समाज के खिलाफ दुष्प्रचार और तुष्टिकरण से प्रेरित बताया। साथ ही विश्वविद्यालयों में हो रही गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
विहिप नेता विनोद बंसल ने कहा, "मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता आयु के जिस पड़ाव पर हैं, अब उन्हें राम का नाम लेना चाहिए लेकिन वे राम से द्वेष करते हैं और झूठ के सरगना बनने का प्रयास करते हैं। कम से कम राहुल गांधी के झूठे बयानों और झूठे प्रपंच के चंगुल में तो आप मत फंसिए। हिंदू समाज में छुआछूत के समूल नाश का संकल्प पूरे संघ परिवार ने लिया हुआ है। संघ के स्वयंसेवक शाखा में यह भी नहीं जानते कि किसकी क्या जाति है। जहां तक आपकी बात है तो तथ्य और सत्य दोनों सामने आ चुके हैं कि शुद्धिकरण क्या था, किसका था, किसने किया और किसने नहीं किया।"
उन्होंने कहा कि झूठा प्रचार करके हिंदू समाज के विरुद्ध वातावरण बनाना और दलितों का मसीहा बनने का दिखावा करना कांग्रेस को शोभा नहीं देता। हमें पता है कि कांग्रेस उस समय चुप हो जाती है, जब इस्लामिक जिहादी तत्व दलित बंधुओं पर प्रहार करते हैं, उनकी मां-बहनों और बेटियों की अस्मिता से खिलवाड़ करते हैं।
विहिप नेता ने कहा कि ऐसे अनेक मामले हमारी जानकारी में हैं, जहां दलित बेटियों के साथ अत्याचार हुए, लेकिन चूंकि आरोपित इस्लामिक जिहादी थे, इसलिए कांग्रेस का एक भी नेता नहीं बोला, किसी ने आवाज बुलंद नहीं की। छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर और झूठ फैलाकर हिंदू समाज को लांछित करने का प्रयास करना कांग्रेस को शोभा नहीं देता।
मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी को लेकर उन्होंने कहा कि मैं कहता हूं कि यह राजनीतिक शब्दावली का निम्नतम स्तर है। इतनी निकृष्ट शब्दावली का प्रयोग यदि कोई वरिष्ठ नेता करता है, तो लगता है कि वह पार्टी वास्तव में गर्त की ओर जा रही है। यदि कोई छुटभैया नेता ऐसी बात कह देता, तो एक बार समझ में आता, लेकिन कभी मां पर प्रहार करना, कभी पीएम मोदी के पिता पर टिप्पणी करना, कभी देश पर प्रहार करना, कभी देश की धर्म-संस्कृति पर प्रहार करना और कभी देश की अस्मिता पर प्रहार करना, यह कांग्रेस की प्रवृत्ति बन गई है।
विनोद बंसल ने कहा कि कहा भी गया है, "विनाश काले विपरीत बुद्धि"। अब लगता है कि जब पार्टी का मुखिया ही इस प्रकार की मानसिकता का पोषण करेगा, तो बाकी लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है। लेकिन यह देश महान है। जनता इस प्रकार की भाषा को सुनती भी है, समझती भी है और समय आने पर उसका जवाब भी देती है।
जामिया मिलिया इस्लामिया और जेएनयू विवाद पर उन्होंने कहा कि विद्या के मंदिरों में देशभर से छात्र ज्ञान अर्जित करने आते हैं। ऐसे शैक्षणिक संस्थानों को कलंकित करने और उन्हें दूषित मानसिकता का शिकार बनाने का प्रयास अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हमने जामिया में भी देखा कि वहां किस प्रकार जिहादी, कम्युनिस्ट और कांग्रेसी गठजोड़ काम कर रहा था। यह किसी से छिपा नहीं है। आप सोचिए कि किस प्रकार के नारे लगाए जा रहे हैं और किन लोगों के समर्थन में लगाए जा रहे हैं। "फ्री शरजील इमाम", "फ्री उमर खालिद", "फ्री कश्मीर" जैसे नारे आखिर किस मानसिकता को दर्शाते हैं?
विनेद बंसल ने कहा कि ऐसे प्रयास यह संकेत देते हैं कि कुछ लोग विश्वविद्यालयों को वैचारिक संघर्ष का अखाड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन नारों को लगाने वालों और उनका समर्थन करने वालों के प्रति कांग्रेस का नरम रवैया भी सवाल खड़ा करता है। कांग्रेस के सांसद पुलिस से बचते हुए दीवार फांदकर उन लोगों के समर्थन में पहुंचते हैं और बाद में कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं था। यह कांग्रेस की दूषित मानसिकता को दर्शाता है।
वीएचपी नेता ने कहा कि जेएनयू में अब कुछ सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे हैं, इसलिए वहां भी ऐसे तत्व सक्रिय हो गए हैं लेकिन यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि विद्यार्थियों का भविष्य बर्बाद करने वाली ऐसी गतिविधियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि दूसरी बात यह है कि वहां का छात्र समुदाय, विद्यार्थी परिषद और विश्वविद्यालय प्रशासन भी इस विषय पर खड़ा हुआ है। हमें पूरा विश्वास है कि जिहादी या अपराधी मानसिकता वाले और जेल में बंद लोगों के महिमामंडन की प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जो लोग समाज के लिए विषवमन करते हैं, उनका महिमामंडन करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसे किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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