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वीरता के लिए जवानों को दिया गया 'सेना पदक', शहीद की पत्नी बोलीं- हमारे लिए यह गर्व की बात

 

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने शनिवार को राष्ट्र की रक्षा में अटूट प्रतिबद्धता और इकाइयों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए।

लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने नई दिल्ली में पश्चिमी कमान के समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सहित हाल की परिचालन उपलब्धियों ने पश्चिमी कमान की तत्परता और पेशेवर उत्कृष्टता को प्रदर्शित किया है। इस अवसर पर उन्होंने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और कहा कि उनका साहस और समर्पण पूरी भारतीय सेना के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

सेना पदक (वीरता) पाने वाले कई सैनिकों और उनके पारिवारिक सदस्यों ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए अपने अनुभव साझा किए।

ऑपरेशन सिंदूर के लिए सेना पदक (वीरता) से सम्मानित राइफलमैन नजुम उद दीन खान ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मैं अपनी बटालियन के साथ सीमा पर तैनात था। उस दिन दुश्मन के ड्रोन ने हमारी चौकी पर हमला करने का प्रयास किया। मैंने सही समय पर उन ड्रोनों को निशाना बनाया और उन्हें सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इस बहादुरी के लिए मुझे आज सेना पदक से सम्मानित किया गया है।"

सेना पदक (वीरता) से मरणोपरांत सम्मानित शहीद की पत्नी ने कहा, "इस सम्मान के लिए मैं सभी को धन्यवाद देना चाहती हूं। मैं यह भी कहना चाहती हूं कि जीवन में कुछ करना बेहतर है, और देश के लिए कुछ करना तो और भी बेहतर है, बजाय इसके कि कुछ भी न किया जाए। मेरे पति शहीद हो गए, लेकिन हम किसी पर निर्भर नहीं होंगे। हम किसी के सामने हाथ नहीं फैलाएंगे। जो भी फौज में आते हैं, उनके परिवार को अच्छी सुविधाएं मिलती हैं।"

सेना पदक (वीरता) से मरणोपरांत सम्मानित मोहित की पत्नी ने कहा, "मोहित का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। वह सेना के प्रति अत्यंत समर्पित थे और इसके बारे में कभी कोई नकारात्मक बात नहीं सुनते थे। उस रात हमने रात 10 बजे के बाद तक बात की थी और उन्होंने सुबह फिर से बात करने का वादा किया था, लेकिन अगली सुबह हमें पता चला कि मोहित अब इस दुनिया में नहीं हैं। हमारे लिए यह गर्व की बात है, लेकिन अगर यह सम्मान वह खुद लेते तो बहुत अच्छा लगता।"

सेना पदक (वीरता) से सम्मानित मेजर शिवंक पाठक की पत्नी ने कहा, "यह मेरे पूरे परिवार और मेरे लिए बेहद गर्व का क्षण है। यह एक ऐसा पुरस्कार है जो वीरता को मान्यता देता है, जो बहुत कम लोगों को मिलता है। बेशक, डर तो लगता है, लेकिन हमारे भीतर साहस भी है। हमें हमेशा विश्वास रहता है कि सब ठीक हो जाएगा। हमें भगवान पर भी भरोसा रहता है।"

पश्चिमी कमान के अलंकरण समारोह-2026 में सेना पदक (वीरता) से सम्मानित मेजर शिवंक पाठक ने कहा, "2024 में मैं उरी सेक्टर में राष्ट्रीय राइफल्स की आरटीयू बटालियन में तैनात था। अक्टूबर में हमें काफी समय से खुफिया जानकारी मिल रही थी कि नियंत्रण रेखा के पार लगभग पांच सक्रिय आतंकवादी गश्ती दल मौजूद हैं। इनमें से कई आतंकवादी भोर से पहले हमारी सीमा पार करने की योजना बना रहे थे। अत्यंत विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर हमें एक रात कार्रवाई योग्य सूचना मिली। हम तैनात थे, हमें दो लोगों की हरकतें दिखाई दीं। हमने उन्हें ट्रैक किया और फिर एक आतंकी को मार गिराया। 72 घंटे में हमने दूसरे आतंकी को भी मार गिराया था।"

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी