वीर सावरकर के पोते का कांग्रेस पर आरोप, राजनीतिक लाभ के लिए बदनाम करने की कोशिश
मुंबई, 28 मई (आईएएनएस)। विनायक दामोदर सावरकर की 143वीं जयंती के मौके पर उनके पोते रंजीत सावरकर ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस अपने राजनीतिक फायदे के लिए वीर सावरकर को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि सावरकर को ब्रिटिश शासन के दौरान लंबे समय तक जेल में रखा गया और उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, इस इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए सावरकर की छवि को बार-बार निशाना बनाया जाता है।
उनका कहना है कि सावरकर का हिंदुत्व किसी धार्मिक संकीर्णता का नाम नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय विचार है। उन्होंने इसे राष्ट्र के प्रति जुड़ाव और पुण्यभूमि की भावना से जोड़ा। उनके अनुसार, इसमें किसी पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठान का सवाल नहीं है, बल्कि यह इस बात पर आधारित है कि कौन इस देश को अपनी मातृभूमि और पुण्यभूमि मानता है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस भावना को स्वीकार करते हैं, वे इस विचारधारा के दायरे में आते हैं।
रंजीत सावरकर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल हिंदुत्व को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं और इसे धार्मिक रंग देकर वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। उनके अनुसार यह सब सिर्फ चुनावी लाभ के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जमाने में अब जनता ज्यादा जागरूक हो गई है। उनके अनुसार अब जानकारी को पहले की तरह नियंत्रित करना आसान नहीं है और लोग असलियत समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक दल जनता को गुमराह करने की कोशिश करेंगे तो इसका असर भविष्य में चुनावों पर जरूर पड़ेगा।
रंजीत सावरकर ने कहा, "आज वीर सावरकर की 143वीं जयंती है और इसे पूरे देश में मनाया जा रहा है, लेकिन हमारी इच्छा है कि यह जयंती केवल फूलों से ही न मनाई जाए। यह बहुत जरूरी है कि सावरकर के विचारों और कार्यों का अनुसरण किया जाए।"
उन्होंने कहा कि आज के भारत में सावरकर के कई विचारों को नीतियों में कहीं न कहीं लागू होते हुए देखा जा सकता है, चाहे वह विदेश नीति हो, युद्ध नीति हो या आर्थिक दृष्टिकोण। आज भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध घुसपैठ और उसके चलते जनसांख्यिकी बदलाव की है, इसलिए वह चाहते हैं कि वीर सावरकर की 150वीं जयंती से पहले यह समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाए।
रंजीत सावरकर का कहना है कि बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग भारत में आ रहे हैं और यह एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसका असर चुनावों पर पड़ रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां जीत-हार का अंतर बहुत कम होता है। उनके अनुसार, कुछ जगहों पर यह छोटी-छोटी मार्जिन वाली जीत भी इस समस्या से प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया और कहा कि इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि कई राज्यों में यह चिंता का विषय है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि सरकारों के सामने तकनीकी और प्रशासनिक कठिनाइयां हैं। पुलिस बल की कमी और संसाधनों की सीमाओं की वजह से इस समस्या से निपटना आसान नहीं है। इसी कारण उन्होंने कहा कि इसके लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जानी चाहिए, जो विशेष रूप से इस तरह के मामलों पर काम करे।
उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कोई भी सरकार हो, कांग्रेस या भाजपा, अगर कोई विदेशी नागरिक अवैध रूप से देश में रह रहा है तो उसे कानून के तहत पहचान कर बाहर निकालना सभी की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार इसके लिए एक मजबूत सिस्टम और अलग से कानून या तंत्र बनाने की जरूरत है, ताकि प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सके।
इसी बातचीत में उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया एक शुरुआती कदम हो सकती है, लेकिन असली काम नागरिकता की स्पष्ट पहचान से होगा। उनके अनुसार पहले वोटर लिस्ट ठीक करना जरूरी है, लेकिन उसके बाद एक सिटीजनशिप रजिस्टर भी बनना चाहिए, ताकि यह तय हो सके कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। अगर कोई नागरिक नहीं है तो उसे देश छोड़ना चाहिए।
--आईएएनएस
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