वायुसेना के 42 स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा, 261 शिक्षक बने साइबर अपराध रोकने में मददगार
नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। बच्चों को इंटरनेट की दुनिया में ऑनलाइन ठगी, साइबर अपराध, गलत सामग्री और डिजिटल शोषण से बचाने के लिए भारतीय वायुसेना ने बड़ी पहल की है। इसके तहत देशभर के 42 वायुसेना स्कूलों को 'स्क्रॉलकंट्रोल' बाल डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम से जोड़ा गया है। इस कार्यक्रम के तहत 261 शिक्षकों को साइबर अपराध से जुड़े मामलों में प्रशिक्षण दिया गया है।
ये शिक्षक शुरुआती स्तर पर मदद पहुंचाने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हैं। अब ये शिक्षक स्कूलों में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ साइबर अपराध से जुड़े मामलों में छात्रों की शुरुआती मदद भी कर सकेंगे। आज तेज गति वाले नेटवर्क और स्मार्टफोन की आसान उपलब्धता के कारण स्कूली बच्चे भी सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया से लगातार जुड़ रहे हैं, लेकिन इंटरनेट पर मौजूद हर सामग्री बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होती।
ऐसे में उनके ऑनलाइन शोषण, गलत तरीके से संपर्क साधने, एआई के दुरुपयोग, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े खतरों और आर्थिक धोखाधड़ी का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। इसी चुनौती को देखते हुए शिक्षकों को विशेष रूप से तैयार किया गया है। इससे किसी घटना की जानकारी मिलने पर स्कूल स्तर पर ही समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे। इस कार्यक्रम के तहत वायुसेना स्कूलों में साइबर क्लब भी बनाए जा सकेंगे। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया जाएगा।
स्कूलों में शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा परिवारों को बच्चों की उम्र के हिसाब से डिजिटल सामग्री की उपयुक्तता समझने के लिए एक मंच भी उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले स्कूलों को 'साइबर सुरक्षित स्कूल' के रूप में पहचान मिलेगी। सीबीएसई ने भी अपने संबद्ध स्कूलों को हर महीने 'साइबर जागरूकता दिवस' मनाने और साइबर सुरक्षा से जुड़ी अच्छी आदतों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है।
वायुसेना स्कूलों में शुरू की गई यह पहल इसी दिशा में एक कदम है। इससे स्कूलों को अपने स्तर पर प्रशिक्षित शिक्षकों की मदद से साइबर सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां चलाने में मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षण और प्रमाणन देने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा डेटाबेस में भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा साइबर अपराध से प्रभावित बच्चों और परिवारों को 24 घंटे सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसमें साइबर कानून विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो जरूरत के अनुसार पीड़ितों को सहायता देंगे।
इस पहल से वायुसेना स्कूलों में बच्चों को केवल इंटरनेट के इस्तेमाल के बारे में ही नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। साथ ही शिक्षक साइबर खतरे की स्थिति में बच्चों के लिए पहली मदद उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। यह पहल भारतीय वायुसेना मुख्यालय के अधीन वायुसेना शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सोसायटी ने आईएसएसी फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की है।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के दौरान शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य वायुसेना स्कूलों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को इंटरनेट के खतरों से बचाने के लिए स्कूल स्तर पर ही एक मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।
--आईएएनएस
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