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वाराणसी में मतगणना पर सियासी संग्राम, अखिलेश बोले- यूपी एमएलसी चुनाव में भाजपा ऑल आउट

 

लखनऊ, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक सीट की मतगणना को लेकर वाराणसी में सियासी घमासान तेज हो गया है। मतगणना रुकने, भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और पुलिस के साथ नोकझोंक के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनाव परिणाम में हेरफेर की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव में पूरी तरह हार चुकी है। अखिलेश ने चेतावनी दी कि मतगणना में हेरफेर की कोशिश करने वाले अधिकारियों को अदालत में घसीटा जाएगा।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर वाराणसी में मतगणना रोके जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि वाराणसी में मतगणना रोक देने के पीछे रिजल्ट बदलने की पुरानी भाजपाई चाल चली जा रही है। सुना है हार के डर से कोई इधर-उधर की चहलकदमी कर रहा है। वाराणसी में एमएलसी चुनाव में हार से हताश भाजपा की हालत खराब है। लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फ़ोन नहीं उठा रहे हैं। देखना ये है कि बनारस का नतीजा बैलेट पेपर की गणना से आता है या लखनऊ से आए ‘दूरदृष्टा-दूरभाष’ की टनटनाहत से। ‘पीडीए प्रहरियों’ की आंखें ही नहीं, कान भी पूरी तरह मुस्तैद हैं और सारे पुख्ता सबूत भी जुटा लिए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि चेतावनी देने के बाद भी अगर नतीजे में हेरफेर करने की कोशिश की गई तो एक-एक ‘संलिप्त अधिकारी’ को कोर्ट में घसीटा जाएगा, तब किसी ‘सर का असर’ काम नहीं आयेगा न ही उन्हें बचाने भाजपाई आएंगे क्योंकि भाजपा किसी की सगी नहीं है। वाराणसी के अपने कार्यकर्ताओं से फिर से हमारी अपील है कि जब तक जीत का प्रमाण नहीं, तब तक विश्राम नहीं। दरअसल, पीडीए की जीत पर ये भी अंदर-ही-अंदर खुश हैं, घर छोड़ देने से कोई पराया नहीं हो जाता है। अगर षड्यंत्रकारी भाजपाइयों ने गोरखपुर में घोड़े की ढाई चाल न चली होती तो वहां भी बनारसवाला हाल होता। कुल मिलाकर तो गोरखपुर भी भाजपा नैतिक रूप से हार ही गई है।

उन्होंने कहा कि बनारस के अंतिम नतीजे आने तक हमारी अपने सभी कार्यकर्ताओं से ये अपील है कि जब तक हाथ में जीत का प्रमाण नहीं, तब तक विश्राम नहीं। एमएलसी चुनावों ने भाजपा का बोरिया बिस्तर बांध दिया है। घोर बेईमानी और प्रशासनिक हेराफेरी के बावजूद भाजपा की दुर्गति कोई नहीं रोक पाया। जिन भ्रष्ट अधिकारियों ने भाजपा की चाकरी की है, उन सबको पीडीए सरकार आने पर जनता के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।”

इस बीच वाराणसी में मतगणना स्थल पर तनाव की स्थिति बनी रही। पश्चिमी गेट पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कहासुनी तथा नोकझोंक हुई। कार्यकर्ता पुलिस को हटाकर मतगणना स्थल के अंदर जाने की मांग कर रहे थे। रास्ते में रोके जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वाराणसी में स्नातक एमएलसी सीट की मतगणना के दौरान भाजपा कार्यकर्ता दोबारा धरने पर बैठ गए।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चार राउंड की मतगणना के बाद सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा करीब पांच हजार मतों से आगे चल रहे थे। भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह से आपत्ति संबंधी पत्र मांगे जाने के बाद अधिकारी उनके टेंट तक पहुंचे। मतगणना स्थल पर विरोध कर रहे भाजपा कार्यकर्ता अंतिम बैरिकेडिंग तक पहुंच गए और नारेबाजी की। इस दौरान चुनाव पर्यवेक्षक प्रांजल यादव को लेकर भी नारे लगाए गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रांजल यादव पूर्व में वाराणसी के जिलाधिकारी रह चुके हैं और सपा नेताओं से उनके करीबी संबंध हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा नेता विकास सिंह ने भी मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पक्ष के मतों को अवैध घोषित किया जा रहा है, जबकि दूसरे पक्ष के मतों को वैध माना जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब उनका एजेंट मतगणना टेबल पर मौजूद नहीं था, तब मतों की गिनती क्यों की गई। उन्होंने एजेंट की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से मतगणना कराने की मांग की और विरोध में अपने समर्थकों के साथ बैठने की बात कही।

प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई। मौके पर डीसीपी काशी गौरव बंसवाल, डीसीपी गोमती नीतू कादयान, चार एसीपी, छह थानों की पुलिस फोर्स और चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारी मौजूद रहे। वाराणसी की मतगणना को लेकर सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी