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'वंदे मातरम' पर विवाद बेवजह, यह स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा रहा है : श्रीराज नायर

 

मुंबई, 11 अगस्त (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 'वंदे मातरम' को लेकर शुरू की गई पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 'वंदे मातरम' देशवासियों के लिए एक प्रेरणादायक उद्घोष था और उस समय इसे लेकर किसी तरह का विवाद नहीं था। उन्होंने अभिनेता प्रकाश राज के वोटरलिस्ट से नाम हटाए जाने संबंधी दावे पर सवाल उठाते हुए इसे सुर्खियों में बने रहने की कोशिश बताया। वहीं, उन्होंने इस्कॉन मंदिरों में ड्रेस कोड लागू किए जाने के फैसले का समर्थन किया और कहा कि धार्मिक संस्थानों को अपने नियम तय करने का अधिकार है।

'वंदे मातरम' को लेकर श्रीराज नायर ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के लोगों ने वंदे मातरम को बड़े उत्साह के साथ गाया और आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। उस दौर में इसको लेकर किसी तरह का विवाद नहीं था। बाद के वर्षों में कुछ राजनीतिक दलों ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते वंदे मातरम को विवाद का विषय बनाने की कोशिश की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल एक विशेष समुदाय को डराने या भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि वंदे मातरम देश की स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़ा हुआ है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। यह गीत आगे भी देश में गाया जाता रहेगा। स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में इस तरह की पहल का होना स्वागत योग्य है, हालांकि उन्होंने इसे इतने वर्षों बाद किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती दौर से ही 'वंदे मातरम' देश के लोगों के बीच लोकप्रिय रहा है और आजादी की लड़ाई में विभिन्न वर्गों के लोगों ने इसे गाया था। बाद में तुष्टिकरण की राजनीति के चलते इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई। वंदे मातरम को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए और सभी देशवासियों को इसे सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए।

इस्कॉन मंदिरों में ड्रेस कोड को लेकर श्रीराज नायर ने कहा कि इस्कॉन एक धार्मिक और आध्यात्मिक संस्था है, जिसके मंदिर दुनिया के कई देशों में हैं। विदेशों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस्कॉन मंदिरों में जाते हैं और वहां मंदिर की गरिमा के अनुरूप कपड़े पहनकर आने की परंपरा देखने को मिलती है। मंदिर एक धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है, जहां लोग पूजा-पाठ और आध्यात्मिक अनुभव के लिए जाते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय सभ्य और मर्यादित वस्त्र पहनना उचित है। किसी भी धार्मिक संस्था को अपनी आंतरिक नियमावली बनाने का अधिकार है। यदि इस्कॉन ने छोटे कपड़े पहनकर प्रवेश पर रोक लगाने का नियम बनाया है, तो यह संस्था के अधिकार क्षेत्र में आता है। एक धार्मिक-आध्यात्मिक संगठन के तौर पर इस्कॉन को अपने संस्थानों के लिए नियम तय करने और उन्हें लागू करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने मंदिरों में ड्रेस कोड लागू किए जाने के फैसले का स्पष्ट रूप से समर्थन किया।

अभिनेता प्रकाश राज द्वारा वोटर-लिस्ट में अपना नाम नहीं होने से जुड़े दावे पर नायर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रकाश राज पर भाजपा, हिंदुत्व और हिंदू धार्मिक परंपराओं को लेकर लगातार टिप्पणी करने का आरोप लगाया। नायर ने दावा किया कि प्रकाश राज का व्यवहार कथित तौर पर एकतरफा रहा है और वह केवल हिंदू धर्म, हिंदू मान्यताओं तथा हिंदू साधु-संतों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने प्रकाश राज को सिलेक्टिव एक्टिविस्ट बताते हुए कहा कि उनके बयानों और गतिविधियों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

नायर ने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा कोई मामला है तो संबंधित व्यक्ति को चुनावी अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखनी चाहिए। यदि मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसके समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है और सुनवाई का अवसर भी मिलता है। संबंधित प्राधिकरणों के पास जाने के बजाय इस मुद्दे को सार्वजनिक विवाद बनाना सुर्खियों में बने रहने की कोशिश हो सकती है। प्रकाश राज पर निशाना साधते हुए श्रीराज नायर ने कहा कि अभिनेता लंबे समय से भाजपा, हिंदुत्व और हिंदू धार्मिक मान्यताओं को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रकाश राज का सार्वजनिक रुख एकतरफा रहा है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम