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वैश्वीकरण में चीन अग्रणी भूमिका निभाएगा: अमेरिकी स्तंभकार केविन केली

 

बीजिंग, 15 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रसिद्ध अमेरिकी स्तंभकार, इंटरनेट विशेषज्ञ और भविष्यवादी केविन केली ने हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) को दिए एक इंटरव्यू में शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण को रोका नहीं जा सकता और आने वाले समय में चीन इसमें अग्रणी भूमिका निभाएगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में चिप्स की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए केविन केली ने कहा कि अगले पांच वर्षों में चीन दुनिया की सबसे उन्नत चिप्स बनाने में सक्षम हो सकता है। उन्होंने बताया कि चीन में उनकी मुलाकात कई इंजीनियरों से हुई, जिनकी महत्वाकांक्षा और क्षमता से वह बेहद प्रभावित हुए। उनका मानना है कि चीन की तेज़ विकास गति इस अनुमान को हकीकत में बदल सकती है।

केविन केली ने कहा कि कई लोगों का मानना है कि चीन के पास 4-नैनोमीटर चिप्स के निर्माण के लिए जरूरी उपकरण नहीं हैं, लेकिन चीन ऐसे उपकरण खुद विकसित करने की क्षमता रखता है। उनके अनुसार, यह मूल रूप से इंजीनियरिंग की चुनौती है और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में चीन की विशेषज्ञता बेहद मजबूत है। उन्होंने कहा कि फिलहाल चीन के पास इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी जरूरी परिस्थितियां मौजूद हैं।

केविन केली के मुताबिक, दुनिया लगातार अधिक वैश्वीकृत होती जा रही है और यह रुझान आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि प्रौद्योगिकी स्वाभाविक रूप से वैश्वीकरण को बढ़ावा देती है और उसी माहौल में सबसे बेहतर तरीके से विकसित होती है। इससे तकनीक के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर पैदा होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में दुनिया पहले से कहीं अधिक वैश्वीकृत होगी। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में चीन परस्पर निर्भर और अधिक एकीकृत वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

इंटरव्यू में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा की बात करते हुए केविन केली ने कहा कि एआई शिक्षा क्षेत्र में बड़ा क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उनका मानना है कि एआई 'हर छात्र की क्षमता के अनुसार शिक्षा' के सदियों पुराने आदर्श को सच करने में मदद कर सकता है, जिससे पढ़ाई हर बच्चे के लिए ज़्यादा व्यक्तिगत और आसान हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर में शिक्षा का सबसे बड़ा मकसद हर बच्चे को उसकी अपनी रफ़्तार से सीखने देना है, न कि उसे क्लास के सबसे धीमे बच्चे की रफ़्तार से चलने पर मजबूर होना पड़े। हालांकि, 30 बच्चों वाली क्लास में किसी एक टीचर के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में एआई एक 'असिस्टेंट टीचर' की तरह काम कर सकता है, जो हर छात्र को उसकी रुचि और सीखने की रफ़्तार के हिसाब से गाइड करेगा।

केविन केली के मुताबिक, भविष्य की शिक्षा का मुख्य फोकस 'जवाब देना' नहीं होगा – क्योंकि जवाब देने में तो एआई पहले से ही माहिर है – बल्कि 'सवाल पूछना' होगा। उन्होंने कहा कि एक सही सवाल पूछना, जवाब पाने से कहीं ज़्यादा कीमती है। विज्ञान के क्षेत्र में भी नए आविष्कार अक्सर 'क्या होगा अगर...' जैसे बुनियादी सवालों से ही शुरू होते हैं।

केविन केली ने लोगों को सलाह दी कि वे नई तकनीकों को लेकर अपना नज़रिया खुला रखें और उन्हें बार-बार इस्तेमाल करके देखें, भले ही शुरुआत में वे अधूरी लगें। उन्होंने कहा, "अगर हम नई तकनीकों को अनदेखा करेंगे, उन पर पाबंदी लगाएंगे या उन्हें खारिज करेंगे, तो हम उनके विकास की दिशा तय नहीं कर पाएंगे।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन तकनीकों के फ़ायदों को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ाने और उनकी कमियों को कम करने का इकलौता रास्ता यही है कि हम इनका इस्तेमाल करें।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

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