उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027: संतकबीरनगर की तीन विधानसभा सीटों पर 2022 में किसका रहा दबदबा? समझें चुनावी गणित
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्वांचल के राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले संतकबीरनगर में तीन विधानसभा सीटें हैं - मेंहदावल, खलीलाबाद और धनघटा (आरक्षित)। पिछले एक दशक में इन सीटों पर भाजपा, सपा, बसपा, पीस पार्टी और निषाद पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। हालांकि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों ने जिले में मजबूत पकड़ बनाई।
मेंहदावल विधानसभा जिले की सबसे रोचक सीटों में मानी जाती है। 2022 के चुनाव में निषाद पार्टी के अनिल कुमार त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी के जयराम पांडेय को महज 5,223 वोटों से हराया। उन्हें 90,193 वोट मिले, जबकि जयराम पांडेय को 84,970 वोट प्राप्त हुए। बसपा के मोहम्मद तबिश खान तीसरे स्थान पर रहे। इससे पहले 2017 में भाजपा के राकेश सिंह बघेल ने 42 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि 2012 में यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। यहां निषाद, ब्राह्मण, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग चुनाव परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खलीलाबाद विधानसभा जिले की राजनीतिक दृष्टि से सबसे चर्चित सीट मानी जाती है। 2022 में भाजपा के अंकुर तिवारी ने 76,086 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी के दिग्विजय नारायण को 63,464 और बसपा के अफ्ताब आलम को 58,368 वोट मिले। जीत का अंतर 12,622 वोट रहा। 2017 में भाजपा के दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे ने जीत हासिल की थी, जबकि 2012 में पीस पार्टी के डॉ. मोहम्मद अयूब ने सभी प्रमुख दलों को चौंकाते हुए यह सीट जीती थी। इस सीट पर ब्राह्मण, मुस्लिम, व्यापारी और ओबीसी मतदाता चुनावी समीकरण तय करते हैं और यहां अक्सर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलता है।
धनघटा विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। 2022 में भाजपा के गणेश चंद्र चौहान ने 83,241 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अलगू प्रसाद को 72,688 वोट मिले। बसपा के संतोष तीसरे स्थान पर रहे। जीत का अंतर 10,553 वोट रहा। इससे पहले 2017 में भाजपा के श्रीराम चौहान ने अलगू प्रसाद को हराया था, जबकि 2012 में अलगू प्रसाद चौहान समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे। इस सीट पर अनुसूचित जाति, चौहान, निषाद और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोट निर्णायक माने जाते हैं।
यदि पिछले तीन विधानसभा चुनावों का विश्लेषण किया जाए तो जिले में भाजपा और उसके सहयोगियों का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है। 2017 में भाजपा ने तीनों सीटों पर मजबूत प्रदर्शन किया और 2022 में भी मेंहदावल, खलीलाबाद और धनघटा तीनों सीटें भाजपा गठबंधन के खाते में गईं। हालांकि 2012 में सपा और पीस पार्टी ने यहां उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था।
दिलचस्प मुकाबलों की बात करें तो मेंहदावल में 2022 का चुनाव सबसे रोमांचक रहा, जहां जीत-हार का अंतर केवल 5,223 वोट रहा। वहीं खलीलाबाद में भाजपा, सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले लगातार चर्चा का विषय रहे हैं।
--आईएएनएस
एएमटी/वीसी