ईरान युद्ध में अमेरिका और इजराइल की रणनीति अलग, वीडियो में देंखे टारगेट को लेकर मतभेद उजागर
ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और इजराइल की रणनीति में स्पष्ट अंतर सामने आया है। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने खुलासा किया है कि दोनों देशों के लक्ष्य और प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, जिससे इस युद्ध के स्वरूप को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।तुलसी गबार्ड के अनुसार, इजराइल इस संघर्ष में ईरान की शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि इजराइल ने हाल के दिनों में ईरान के कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया है, जिससे वहां की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व संरचना को कमजोर किया जा सके। यह रणनीति सीधे तौर पर सत्ता के शीर्ष स्तर पर दबाव बनाने की मंशा को दर्शाती है।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका का दृष्टिकोण इससे अलग है। गबार्ड ने कहा कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। इसमें खासतौर पर बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम, हथियार उत्पादन क्षमता और नौसेना को निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिका मानता है कि ईरान की सैन्य ताकत को कम करके क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है।गबार्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका सीधे तौर पर इजराइल के ऑपरेशनल फैसलों में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल इंटेलिजेंस सपोर्ट प्रदान कर रहा है और जमीनी या रणनीतिक हमलों के फैसले पूरी तरह इजराइल खुद ले रहा है। इस बयान से यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच सहयोग तो है, लेकिन रणनीतिक स्वतंत्रता भी बनी हुई है।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि इजराइल भविष्य में ईरान के साथ किसी संभावित समझौते का समर्थन करेगा या नहीं। इससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध के कूटनीतिक समाधान को लेकर भी दोनों देशों के बीच एकरूपता नहीं है।विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल के अलग-अलग टारगेट इस संघर्ष को और जटिल बना सकते हैं। जहां एक ओर इजराइल त्वरित और निर्णायक कार्रवाई के जरिए नेतृत्व को खत्म करना चाहता है, वहीं अमेरिका लंबी अवधि में ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल के बीच यह रणनीतिक अंतर आने वाले दिनों में संघर्ष की दिशा और तीव्रता दोनों को प्रभावित कर सकता है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह युद्ध किस ओर मोड़ लेता है और क्या इसके बीच कोई कूटनीतिक रास्ता निकल पाता है या नहीं।