CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा, वीडियो में जाने महाराष्ट्र SIR के खिलाफ बॉम्बे HC पहुंचा मामला
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक हाथों में पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे। पोस्टरों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग लिखी थी। स्पीकर ने कांग्रेस विधायकों से पोस्टर हटाने और अपनी सीटों पर बैठने को कहा। इसी दौरान महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। SIR की प्रक्रिया और उससे जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पोस्टर लेकर पहुंचे कांग्रेस विधायक
शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विधायक पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे और उनके इस्तीफे की मांग की। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने विधायकों से पोस्टर हटाने को कहा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर विधानसभा के नियंत्रण में नहीं है। इसके बाद सदन में नारेबाजी और हंगामे की स्थिति बनी। बाद में राज्य का पूर्ण दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर भी सत्ता पक्ष और भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस हुई।
महाराष्ट्र SIR के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं
इसी बीच महाराष्ट्र की मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दो रिट याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में SIR की प्रक्रिया, उसके कानूनी आधार और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े तरीकों पर सवाल उठाए गए हैं। एक याचिका में चुनाव आयोग के SIR से जुड़े 14 फैसलों और कार्रवाई को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों को रद्द करने, SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसी मांगें रखी हैं।
दूसरी याचिका में SIR लागू करने के कारण, इस्तेमाल की गई प्रक्रिया और मतदाता सूची तैयार करने की कार्यप्रणाली को सार्वजनिक करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि किसी मतदाता को हटाने से पहले उसे नोटिस, सुनवाई का अवसर और कारण बताने वाला आदेश मिलना चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
इन याचिकाओं में द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कामकाज और SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, चुनावी डेटाबेस तक पहुंच और सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन आपत्तियों के बावजूद आयोग की ओर से कई फैसले लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित रिकॉर्ड और दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग भी की है। हालांकि, ये दावे फिलहाल याचिकाओं और मीडिया रिपोर्टों में लगाए गए आरोप हैं।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
इस विवाद पर चुनाव आयोग ने 23 सितंबर को कहा था कि चुनाव आयुक्तों के बीच टिप्पणियां और विचार-विमर्श आयोग की सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में संशोधन और SIR से जुड़े फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए। अब बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं के जरिए इन प्रक्रियाओं और फैसलों की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। दोनों मामलों पर आगे की सुनवाई में अदालत याचिकाकर्ताओं की दलीलों और चुनाव आयोग के पक्ष पर विचार करेगी।