उपराष्ट्रपति ने नल्लकन्नू के निधन पर जताया शोक, सार्वजनिक जीवन की तारीफ करते हुए बताया योद्धा
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के वरिष्ठ नेता और स्वतंत्रता सेनानी आर. नल्लकन्नू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
उपराष्ट्रपति के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से पोस्ट जारी करके कहा गया है कि नल्लकन्नू के गुजर जाने की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। वे एक महान नेता थे, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाज की सेवा में बिताई, बिना किसी स्वार्थ के सार्वजनिक जीवन में रहे। वे स्वतंत्रता सेनानी थे और इंडियन पब्लिक प्रॉपर्टी मूवमेंट के पायनियर थे।
पोस्ट में आगे लिखा कि नल्लकन्नू एक योद्धा थे, जिन्होंने मजदूरों के हक, सामाजिक न्याय और दबे-कुचले लोगों की भलाई के लिए जीवन समर्पित कर दिया। उनकी सादगी, ईमानदारी, त्याग और सिद्धांतों के प्रति अटूट लगन के लिए सभी उन्हें पूजते थे। उनका जाना सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।
उपराष्ट्रपति ने उनके परिवार, सीपीआई साथियों और तमिलनाडु के लोगों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि त्याग से भरा उनका संघर्षपूर्ण जीवन हमेशा लोगों के दिलों में रहेगा।
आर. नल्लकन्नू (आर.एन.के. के नाम से प्रसिद्ध) का 25 फरवरी 2026 को चेन्नई के राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में निधन हो गया। वे 101 वर्ष के थे। लंबी बीमारी और उम्र से जुड़ी समस्याओं के कारण 1 फरवरी से अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल ने बताया कि मल्टी-ऑर्गन फेलियर से उनकी मृत्यु हुई। वे सीपीआई के तमिलनाडु राज्य सचिव (1992-2005) रह चुके थे और नेल्लई षड्यंत्र मामले के आखिरी जीवित सदस्य थे।
नल्लकन्नू ने 1943 में 18 वर्ष की उम्र में सीपीआई जॉइन की और 80 वर्ष से अधिक समय तक कम्युनिस्ट आंदोलन, मजदूर-किसान संघर्ष, सामाजिक न्याय, सेकुलरिज्म और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष किया। वे भूमि अधिकार, मजदूरी और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर आंदोलन चलाते रहे। उनका जीवन सादगी की मिसाल था और वे जीवन भर किराए के मकान में रहे, राजनीति को व्यवसाय नहीं बनने दिया।
निधन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, सीपीआई महासचिव डी. राजा, अन्य नेता और संगठनों ने शोक जताया। सीपीआई ने इसे कम्युनिस्ट आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
--आईएएनएस
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