यूपीआई पर चार्ज को लेकर विपक्ष ने कहा, गरीब और छोटे दुकानदारों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। 2000 रुपए से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत यूपीआई चार्ज लगाने के प्रस्ताव पर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस, राजद, आरएसपी और डीएमके ने इसे आम जनता और छोटे व्यापारियों के खिलाफ बताया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार पहले लोगों में डिजिटल पेमेंट की आदत डालती है और फिर उस पर ही चार्ज लगा देती है।
दिल्ली में कांग्रेस नेता शकील अहमद ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा, "सरकार को यह समझना चाहिए। पहले तो आपने लोगों को फोन से पेमेंट करने, आसानी से पैसे ट्रांसफर करने और आसान डिलीवरी की आदत डाली, और अब आप चार्ज लगा रहे हैं। जीएसटी और नोटबंदी के समय भी ऐसा ही हुआ था। अगर आप 2014 से अब तक की हर चीज को देखें तो लोगों के फायदे के लिए क्या काम हुआ है? अगर लोगों को फायदा हो रहा होता तो गरीबी और मुश्किलें नहीं बढ़तीं, और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में भी समस्याएं नहीं होतीं। मैं एक रिपोर्ट देख रहा था कि एयरपोर्ट तो बन गए हैं, लेकिन वहां फ्लाइट्स नहीं चल रही हैं।"
पटना में आरजेडी सांसद मनोज झा ने छोटे दुकानदारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, "सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान है। इस इलाके के लोग उस दुकानदार से सरसों का तेल, दाल, नमक, प्याज, आलू और दूसरी चीजें खरीदते हैं। अगर आप उस छोटे दुकानदार को इस तरह सजा दे रहे हैं तो उसे दाल पर सिर्फ 2 रुपए और दूध पर 1 रुपए का मार्जिन मिलता है। दुख की बात यह है कि आप यह सब किसी विदेशी ताकत के कहने पर कर रहे हैं। मेरे लिए यह ज्यादा बड़ी चिंता की बात है।"
तिरुवनंतपुरम में आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि इसका अंतिम बोझ ग्राहकों पर ही पड़ेगा। उन्होंने कहा, "विपक्ष के नेता पहले ही कह चुके हैं कि यूपीआई फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर लेवी लगाने से आखिरकार आम लोगों पर भारी बोझ पड़ेगा। सरकार अब कह रही है कि यूपीआई फाइनेंशियल लेवी या यूपीआई सर्विस लेवी का बोझ लोगों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसका असर आखिरकार आम लोगों, यानी ग्राहकों पर ही पड़ेगा, क्योंकि मर्चेंट यह बोझ नहीं उठाने वाले हैं।"
चेन्नई में डीएमके प्रवक्ता टी. के. एस. इलांगोवन ने भी इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा, "उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। यह एक पेमेंट है। वे पेमेंट के लिए 0.4 प्रतिशत चार्ज कैसे ले सकते हैं? वे पहले से ही टैक्स स्ट्रक्चर, टैक्स और बाकी सब कुछ चुका रहे हैं। उन्हें बिल भेजा जाता है, फिर वे यूपीआई से पेमेंट करते हैं। बस बात इतनी है कि वे नकद पैसे साथ नहीं रखते और पेमेंट करते हैं।"
विपक्ष का आरोप है कि सरकार डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन इस तरह के चार्ज से लोग फिर से नकद लेनदेन की ओर लौटने को मजबूर होंगे। कांग्रेस ने कहा कि नोटबंदी के बाद लोगों को डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित किया गया, अब उसी पर टैक्स लगाना गरीबों के साथ धोखा है। दूसरी ओर सरकार और भाजपा की ओर से सफाई दी गई है कि यह चार्ज ग्राहक पर नहीं, बल्कि मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर है और इसका असर आम उपभोक्ता पर नहीं पड़ेगा, लेकिन विपक्ष का कहना है कि व्यापारी यह बोझ अंततः ग्राहकों पर ही डालेंगे, जिससे महंगाई और बढ़ेगी।
--आईएएनएस
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