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यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत चार्ज को लेकर सियासत तेज, भाजपा ने कहा- ग्राहक पर नहीं पड़ेगा बोझ, कांग्रेस फैला रही भ्रम

 

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। यूपीआई पर लगाए गए एमडीआर पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सरकार की ओर से सफाई दी गई है कि इसका बोझ आम ग्राहक पर नहीं पड़ेगा, लेकिन विपक्ष इसे लेकर केंद्र पर हमलावर है। वहीं, भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर झूठ और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।

जम्मू-कश्मीर से भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस मुद्दे पर कहा, "यूपीआई पर जो एमडीआर लगाया जा रहा है, वह नहीं लगाना चाहिए और हम इससे सहमत हैं। कमेटी ने यह कदम उठाया है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। इस बात पर चर्चा चल रही है कि दुकानदारों पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।"

दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, "किसी का कोई दबाव नहीं है। वे सभी सोरोस के एजेंडे के हिसाब से काम करते हैं। वे जो कुछ भी कहते हैं, सोरोस के दबाव में कहते हैं। यूपीआई पर बनी कमेटी में उनकी पार्टी के सदस्य भी शामिल थे। जिस बैठक में यह फैसला लिया गया, उसमें कांग्रेस पार्टी के सदस्य भी मौजूद थे और यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था।"

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान का समर्थन करते हुए कहा, "उमर अब्दुल्ला एक समझदार नेता हैं और उन्हें अर्थशास्त्र की समझ है, इसलिए उन्होंने सही बात कही है कि जनता से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।"

हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, "कांग्रेस को आलोचना करने के लिए कोई न कोई बहाना चाहिए होता है। याद कीजिए, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल ट्रांजैक्शन शुरू किए थे, तब कांग्रेस नेता कहते थे—'देश में इंटरनेट कहां है? किसके पास स्मार्टफोन है? डिजिटल ट्रांजैक्शन कौन करेगा?"

विजयवाड़ा में भाजपा नेशनल काउंसिल की सदस्य यामिनी शर्मा ने कहा, "जहां तक यूपीआई की बात है तो मुझे लगता है कि राहुल गांधी को यह भी नहीं पता कि उनकी अपनी पार्टी के सांसदों, जिनमें चिदंबरम समेत पांच सांसद शामिल हैं, ने यूपीआई इकोसिस्टम पर अभी लागू 0.4 प्रतिशत की मामूली फीस का समर्थन किया है। दूसरी ओर, राहुल गांधी गलत जानकारी फैला रहे हैं, इसलिए कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी एक बार फिर लोगों के बीच घबराहट और गलत जानकारी फैलाकर 'झूठ की दुकान' की तरह काम कर रहे हैं।"

भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने कहा, "कोई कंट्रोवर्सी नहीं है। कस्टमर पर कोई चार्जेस एक्स्ट्रा नहीं लगेगा, लेकिन विपक्ष के पास अब मुद्दा नहीं है, तो उनको ऐसे ही झूठे मुद्दे ढूंढने पड़ रहे हैं और मुंह की खानी पड़ती है।"

दिल्ली में मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, "कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का वह बयान याद रखना चाहिए, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब हम दिल्ली से राज्यों को 1 रुपया भेजते हैं तो अलग-अलग स्तरों पर कटौती के बाद उन तक सिर्फ 15 पैसे ही पहुंचते हैं। आज वही कांग्रेस यूपीआई पर सवाल उठा रही है।"

वहीं, मुंबई में शिवसेना शिंदे गुट की नेता मनीषा कायंदे ने सरकार से पुनर्विचार की अपील की। उन्होंने कहा, "मेरी राय में सरकार की तरफ से इस पर सफाई आई है। एक तरफ सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही है और टैक्स भी लगाया जा रहा है। कोविड और नोटबंदी के बाद सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए जो कोशिशें की थीं, उन्हें शायद कहीं न कहीं झटका लग सकता है। व्यापारी यह चार्ज ग्राहकों पर ही डालेंगे। आखिर में ग्राहक को ही यह चार्ज उठाना पड़ेगा। यह कहीं न कहीं गलत है। अगर हो सके तो सरकार को इस मामले पर सोच-विचार करना चाहिए।"

फिलहाल, केंद्र सरकार की ओर से इस पर अंतिम आदेश का इंतजार है, लेकिन भाजपा ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ता पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी