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उपेंद्र कुशवाहा बोले-विरासत का मतलब सरकारी पद नहीं, पूर्वजों की सीख को आगे बढ़ाना है

 

पटना, 23 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को कहा कि राजनीतिक विरासत का मतलब किसी सरकारी पद या सत्ता पर दावा करना नहीं है, बल्कि पूर्वजों से मिली विचारधारा, सीख और सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम उनकी पार्टी के साथ-साथ दूसरी पार्टियां भी कर रही हैं।

प्रेस वार्ता में कुशवाहा ने कहा कि विरासत को लेकर उनके बयान की गलत व्याख्या की जा रही है। कौन सरकार में रहेगा और कौन नहीं रहेगा, यह विरासत का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं और इसका अंतिम मूल्यांकन जनता तथा इतिहास करेगा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर राजनीतिक दलों और नेताओं की राय अलग हो सकती है। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि असहमति के बावजूद सहमति के साथ आगे बढ़ा जाए।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक मंचों की अपनी मर्यादा होती है और उसी के अनुरूप बात रखी जाती है। जनता दल यूनाइटेड से अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने भी संगठन को खड़ा करने में अपना खून-पसीना लगाया है। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार को लेकर उनके मन में स्नेह और आशीर्वाद है। उन्होंने निशांत कुमार और दीपक प्रकाश को भविष्य का युवा नेतृत्व बताते हुए कहा कि दोनों को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

कुशवाहा ने कहा कि मीडिया में कई बार उन्हें और सम्राट चौधरी को आमने-सामने दिखाने की कोशिश की जाती है जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि समता पार्टी के गठन के समय नीतीश कुमार के साथ उन्होंने बिहार में संघर्ष किया था और उस दौर की परिस्थितियों को आज के कई नए राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं जानते।

आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने बिहार में पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा और अन्य वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने का प्रयास किया था। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इस अधूरे प्रयास को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी ने 65 प्रतिशत आरक्षण को लागू कराने की मांग को अपने प्रमुख प्रस्तावों में शामिल किया है।

उन्होंने कहा कि बिहार में जातीय सर्वे के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था तैयार की गई थी और उनकी पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी। युवाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी की सोच और परिस्थितियां बदल चुकी हैं। इसलिए युवाओं की बात सुनना, उनके साथ संवाद करना और उनकी उचित मांगों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुराने तरीके से युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता।

--आईएएनएस

एमएनपी/पीएम