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उपराष्ट्रपति ने कपास क्रांति मिशन की सराहना की, उत्पादकता बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को समयबद्ध मंजूरी पर जोर

 

नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन को मंगलवार को उपराष्ट्रपति भवन में केंद्र सरकार के प्रस्तावित कपास उत्पादकता मिशन (कपास क्रांति) की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत की।

बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और वैश्विक बाजार में भारतीय कपास की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान मिशन के तीन प्रमुख आयामों पर विशेष जोर दिया गया। पहला, अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के तरीकों के माध्यम से प्रति एकड़ कपास की उत्पादकता बढ़ाना। दूसरा, 'कस्तूरी कॉटन सर्टिफिकेशन' और 'किसान कपास ऐप' जैसी पहलों के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले कपास की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना। तीसरा, वस्त्र उद्योग में नवाचार और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए नई पीढ़ी के प्राकृतिक रेशों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।

उपराष्ट्रपति ने भारत के कपास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए मिशन के समग्र दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार को गति देने और नई तकनीकों को तेजी से अपनाने के लिए समयबद्ध मंजूरी प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। उनका मानना था कि यदि अनुसंधान और तकनीक को शीघ्र किसानों तक पहुंचाया जाए तो कपास उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

उन्होंने प्रति एकड़ कपास की पैदावार बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि भारत को प्रमुख कपास उत्पादक देशों के बराबर पहुंचने के लिए स्पष्ट, व्यावहारिक और मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। उत्पादकता में वृद्धि से किसानों की आय बढ़ेगी, उद्योग को बेहतर गुणवत्ता का कच्चा माल मिलेगा और देश की निर्यात क्षमता भी मजबूत होगी।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत करनी होगी ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले कपास की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। उन्होंने मिशन के व्यापक प्रचार-प्रसार, किसानों में जागरूकता बढ़ाने और बाजार की जरूरतों के अनुरूप रणनीतियां तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि मिशन की सफल पहलों और नवाचारों को टेलीविजन डॉक्यूमेंट्री और अन्य जनसंचार माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए, जिससे किसानों और संबंधित हितधारकों को इसका व्यापक लाभ मिल सके।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम