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UP School News: 26 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए या मर्ज? जानिए 465 स्कूलों पर क्यों हुई कार्रवाई
 

 

उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या को लेकर इन दिनों राजनीतिक बहस तेज है. 2017 के बाद राज्य में 26 हजार से ज्यादा सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या कम होने का दावा किया जा रहा है. इस आंकड़े के सामने आने के बाद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों के साथ क्या हुआ.
हालांकि, सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी का मतलब यह नहीं है कि सभी स्कूलों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बड़ी संख्या में स्कूलों को स्कूल कंसोलिडेशन यानी विलय की प्रक्रिया के तहत दूसरे सरकारी स्कूलों के साथ मर्ज किया गया है.


स्कूलों के विलय से घट गई संख्या
स्कूलों के विलय के पीछे कम छात्र संख्या और आसपास स्थित कई स्कूलों को एक साथ संचालित करने जैसे कारण बताए जाते हैं. ऐसे स्कूलों को एक जगह लाकर संसाधनों, शिक्षकों और इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल करने की बात कही गई है.
इस प्रक्रिया के कारण सरकारी स्कूलों की आधिकारिक संख्या में कमी दर्ज हुई है. हालांकि, इसे सभी स्कूलों के पूरी तरह बंद होने के तौर पर देखना अलग बात है. स्कूलों के विलय और स्कूल बंद होने के बीच अंतर को समझना इस पूरे मामले में अहम है.
465 मान्यता प्राप्त स्कूलों पर भी कार्रवाई
इसी बीच उत्तर प्रदेश में शून्य दाखिले वाले 465 निजी स्कूलों की मान्यता रद्द किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. इन स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 के दौरान कोई छात्र दाखिल नहीं हुआ था और न ही नियमित कक्षाएं संचालित होने की जानकारी मिली.
इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 के प्रावधानों के तहत लगातार दो साल तक किसी स्कूल मं5 पढ़ाई या परीक्षा गतिविधि नहीं होने की स्थिति में मान्यता समाप्त करने का प्रावधान है.
प्रयागराज क्षेत्र में सबसे ज्यादा स्कूलों पर कार्रवाई
मान्यता रद्द किए गए स्कूलों में प्रयागराज क्षेत्र की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है. यहां 150 स्कूलों की मान्यता खत्म की गई है. यह कार्रवाई मुख्य रूप से ऐसे संस्थानों के खिलाफ की गई है, जिनमें लगातार दो शैक्षणिक सत्रों के दौरान शैक्षणिक गतिविधियां नहीं हुईं.
इस तरह यूपी में सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी और निजी स्कूलों की मान्यता रद्द होने के मामले अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं. सरकारी स्कूलों के मामले में बड़ी संख्या स्कूलों के विलय से जुड़ी है, जबकि 465 निजी स्कूलों पर कार्रवाई शून्य दाखिले और शैक्षणिक गतिविधियां नहीं होने के आधार पर की गई है.