यूपी में ग्रामीण होम-स्टे का दायरा बढ़ा, अब 8 कमरे और 16 शैय्या तक किराए पर दे सकेंगे भवन स्वामी
लखनऊ, 11 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों के लिए आय तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होम-स्टे नीति-2025 की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब भवन स्वामी अपने आवासीय भवन के अधिकतम आठ कमरे यानी 16 शैय्या तक पर्यटकों को किराए पर दे सकेंगे। पहले यह सीमा छह कमरे और अधिकतम 12 शैय्या थी।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को बताया कि संशोधित व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक भवन स्वामियों को नीति से जोड़ना और देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश में रहने, स्थानीय भोजन तथा ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव उपलब्ध कराना है। यह नीति उत्तर प्रदेश के संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र में लागू होगी।
उन्होंने बताया कि संशोधित एसओपी के तहत संपत्तिधारक अपने आवासीय भवन के कम से कम एक और अधिकतम आठ कमरों को होम-स्टे के रूप में किराए पर दे सकेंगे। इन कमरों में अधिकतम 16 शैय्या की व्यवस्था की जा सकेगी। रूरल होम-स्टे में पर्यटकों के लिए स्नानागार, शौचालय, पानी, बिजली और सामान्य फर्नीचर जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि नगर निगम की सीमा से बाहर आने वाली इकाइयां इस श्रेणी के तहत आवेदन कर सकेंगी। इससे ग्रामीण इलाकों में मौजूद आवासीय परिसंपत्तियों को पर्यटन से जोड़ने और पर्यटकों को गांवों के जीवन, संस्कृति और स्थानीय परिवेश से परिचित कराने में मदद मिलेगी। संशोधित प्रावधानों के तहत आवेदक के चरित्र संबंधी प्रमाणन के लिए पुलिस विभाग द्वारा निर्धारित स्व-प्रमाणन पत्र के प्रारूप का इस्तेमाल किया जाएगा। एसओपी में इस प्रक्रिया को भी निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप सरल बनाया गया है, जिससे इच्छुक भवन स्वामियों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सके।
सरकार ने एसओपी में सबसे अहम बदलाव आवासीय कमरों की संख्या को लेकर किया है। संशोधन से पहले भवन स्वामी न्यूनतम एक और अधिकतम छह कमरे, यानी अधिकतम 12 शैय्या तक पर्यटकों को उपलब्ध करा सकते थे। अब यह सीमा बढ़ाकर आठ कमरे और अधिकतम 16 शैय्या कर दी गई है।
जयवीर सिंह ने कहा कि इस बदलाव से अधिक संख्या में भवन स्वामी बीएंडबी और होम-स्टे व्यवस्था से जुड़ सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों के ठहरने की क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलेगी। पर्यटन मंत्री ने कहा कि बीएंडबी और होम-स्टे योजना केवल पर्यटकों के लिए ठहरने की सुविधा बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा। भवन स्वामियों के लिए यह अतिरिक्त आय का जरिया बनेगा, जबकि भोजन, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति, परंपरा, खानपान और प्राकृतिक परिवेश को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में यह संशोधन महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनें और प्रदेश के गांव देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनें।
--आईएएनएस
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