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यूपी की तर्ज पर काम कर रही दिल्ली सरकार, शालीमार मस्जिद पर कार्रवाई गलत: मौलाना शहाबुद्दीन

 

बरेली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली में मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को लेकर मौलाना शहाबुद्दीन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की आलोचना की। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसी भी धर्म के पूजा स्थलों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। साथ ही, यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने समाजवादी पार्टी से मुस्लिम आबादी के अनुपात के आधार पर मुसलमानों को टिकट देने की मांग की।

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर दिल्ली की रेखा सरकार भी काम करने लगी है। जहां लोग इबादत, पूजा-पाठ और नमाज अदा करते हैं, ऐसे धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। इस तरह की कार्रवाई तंग नजरिए और पक्षपात की बुनियाद पर की जा रही है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कुछ दिन पहले सहारनपुर की मस्जिद को गिराए जाने के बाद अब दिल्ली में शालीमार मस्जिद को निशाना बनाया जा रहा है।

मौलाना शहाबुद्दीन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से ऐसी कार्रवाइयों से बचने की मांग करते हुए कहा कि इससे समाज में शांति कायम रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ यह बात कही जाती है, जबकि मुख्यमंत्री की ओर से विश्वास तोड़ने वाली कार्रवाई की जा रही है। इससे समाज को नुकसान होगा और समाज को नुकसान होने पर देश भी प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी इबादतगाह पर बुलडोजर नहीं चलाया जाना चाहिए। चाहे वह मस्जिद हो, मंदिर, गुरुद्वारा या चर्च, सरकारों को सभी धार्मिक स्थलों के मामले में ऐसी कार्रवाई से बचना चाहिए।

इसके अलावा, मौलाना शहाबुद्दीन ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुस्लिम आबादी के प्रतिशत के हिसाब से टिकट देने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि वह लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 150 ऐसी सीटें हैं, जहां मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। उनका कहना है कि इन सीटों पर मुसलमानों को टिकट दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी में मुस्लिम आबादी के अनुपात में टिकट नहीं दिए जाते और उम्मीदवारी तय करने में भी इसका ध्यान नहीं रखा जाता। उन्होंने विशेष रूप से अखिलेश यादव के दौर को लेकर यह दावा किया।

सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए मौलाना ने कहा कि प्रधानी, ब्लॉक प्रमुख या जिला पंचायत जैसे स्थानीय पदों पर भी मुसलमानों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। ऐसे पदों पर पार्टी के परिवार के लोगों को ही प्राथमिकता दी जाती है। 2027 के चुनाव में यह स्थिति चलने वाली नहीं है।

--आईएएनएस

पीएसके