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केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में स्वीकारा: राजस्थान में औसतन हर 50 किलोमीटर पर टोल

 

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में लोकसभा में यह स्वीकार किया कि राजस्थान में औसतन हर 50 किलोमीटर पर एक टोल है। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय औसत की बात की जाए तो पूरे देश में यह औसत लगभग 48.87 किलोमीटर है। इस खुलासे के बाद टोल की संख्या और उसकी दूरी को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

मंत्री गडकरी ने संसद में स्पष्ट किया कि टोल संग्रह राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टोल लगाने का उद्देश्य सड़क निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान में टोल की संख्या देश के औसत के अनुरूप ही है।

राजस्थान में टोल की अधिकता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि छोटी दूरी में लगातार टोल शुल्क देना उनके लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि टोल नीति में स्थानीय परिस्थितियों और नागरिकों की सहूलियत का ध्यान रखा जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि टोल राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी योजना और दूरी का निर्धारण यातायात, दूरी और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल पेमेंट और सीधी टोल नीति के माध्यम से टोल संग्रह प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुगम बनाया जा सकता है।

राजस्थान में पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों के चलते राजमार्गों पर भारी ट्रैफिक रहता है। ऐसे में लगातार टोल मिलने से वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कुछ टोल प्लाजा पर डिजिटल और स्वचालित संग्रह प्रणाली लागू की है, जिससे समय और लागत की बचत हो सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री द्वारा संसद में यह स्वीकारोक्ति टोल नीति को लेकर सार्वजनिक बहस को और अधिक सक्रिय करेगी। इसके अलावा यह नागरिकों और राज्य सरकार के बीच संवाद को भी मजबूती दे सकती है।

टोल नीति विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे बड़े राज्य में सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं के लिए टोल एक जरूरी साधन है। लेकिन इसके साथ ही यह आवश्यक है कि नागरिकों और छोटे व्यवसायियों के लिए राहत और सुविधा के उपाय भी लागू किए जाएँ।