यूएनजीए में सांसद कमलजीत सहरावत ने रखा भारत का पक्ष, बोलीं- पारंपरिक हथियारों पर सैन्य जरूरत और मानवीय पहलू में संतुलन जरूरी
न्यूयॉर्क, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पारंपरिक हथियारों को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए सैन्य जरूरत और मानवीय पहलुओं के बीच संतुलन पर जोर दिया है। यूएनजीए की फर्स्ट कमेटी में भरतीय जनता पार्टी की लोकसभा सदस्य कमलजीत सहरावत ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि भारत सीसीडब्ल्यू के सभी पांच प्रोटोकॉल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।
उन्होंने घातक स्वायत्त हथियार प्रणाली और सैन्य एआई पर चल रही चर्चाओं में प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में सुरक्षा, विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर आधारित भरोसेमंद एआई के लिए घरेलू ढांचा तैयार किया है। साथ ही अवैध हथियार व्यापार, आतंकवाद और आईईडी खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात दोहराई।
सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा, "सीसीडब्ल्यू के सभी पांच प्रोटोकॉल के पक्षकार के रूप में भारत का मानना है कि इसकी स्थायी शक्ति संतुलन में निहित है, जो सैन्य आवश्यकता और मानवीय अनिवार्यता के बीच तालमेल स्थापित करती है और एक ही ढांचे के भीतर विविध सुरक्षा हितों वाले राज्यों को एक साथ लाती है। संशोधित प्रोटोकॉल-II भूमि माइनों से उत्पन्न मानवीय चिंताओं को लंबी सीमाओं वाले राज्यों की वैध रक्षा आवश्यकताओं के साथ संतुलित करता है।"
उन्होंने कहा कि भारत ने इस प्रोटोकॉल के तहत अपने दायित्वों का पालन किया है, जिसमें गैर-पहचान योग्य माइनों का उत्पादन न करना और सभी एंटी-पर्सनल माइनों को पहचान योग्य बनाना शामिल है। यह प्रोटोकॉल आतंकवादी और अवैध सशस्त्र समूहों द्वारा अक्सर तैनात किए जाने वाले आईईडी से निपटने के लिए भी एक ढांचा प्रदान करता है। भारत आईईडी के खतरे को कम करने और पीड़ित सहायता को उच्च प्राथमिकता देता है।
कमलजीत सहरावत ने कहा कि प्रोटोकॉल-V के एक अंतरराष्ट्रीय हस्ताक्षरकर्ता के रूप में भारत युद्ध से उत्पन्न विस्फोटक अवशेषों के कारण होने वाले मानवीय नुकसान के प्रति गहराई से संवेदनशील है। हाल के वर्षों में, 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' पहल के अंतर्गत कई देशों में 15,000 से अधिक कृत्रिम अंग शिविर आयोजित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, भारत ने सैन्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर पहले संयुक्त राष्ट्र अनौपचारिक विचार-विमर्श में रचनात्मक रूप से भाग लिया और उसका सह प्रायोजन भी किया। भारत ने रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद एआई के मूल्यांकन हेतु एक घरेलू ढांचा विकसित किया है, जो विश्वसनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और निष्पक्षता सहित पांच सिद्धांतों पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि भारत छोटे हथियारों और हल्के हथियारों पर संयुक्त राष्ट्र कार्ययोजना और अंतरराष्ट्रीय ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट्स का समर्थन करता है। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले अवैध हथियारों के व्यापार के विरुद्ध भारत, काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र शांति और निरस्त्रीकरण के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय केंद्र के साथ सक्रिय रूप से कार्य करता है।
सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि इस वर्ष, भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एसएएलडब्ल्यू नियंत्रण के लिए पहली बार संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप की मेजबानी की, जिसमें क्षमता निर्माण के हमारे सामूहिक प्रयासों को सुदृढ़ करने के लिए 18 देशों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया।
उन्होंने कहा कि भारत पारंपरिक हथियारों और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए उनके उपयोग को भी बढ़ावा देता है।
--आईएएनएस
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