'यूएन में झूठे दावे पेश करने से नहीं बदलेगी हकीकत', द्वीपों पर कब्जे के यूएई के आरोप पर गरीबाबादी
तेहरान, 29 सितंबर (आईएएनएस)। ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की ओर से लगाए गए तीन द्वीपों पर कब्जे के आरोप में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर झूठे दावे पेश करने से हकीकत नहीं बदल जाएगी। ये द्वीप ईरान का हिस्सा हैं और इनको अलग नहीं किया जा सकता।
गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''ईरानी द्वीपों को लेकर बिना आधार के दावों को बार-बार दोहराने से हकीकत नहीं बदलती, भले ही ये दावे संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से ही क्यों न किए जाएं। ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा ईरान के क्षेत्र का ऐसा हिस्सा हैं, जिन्हें उससे अलग नहीं किया जा सकता।''
उन्होंने कहा, ''यूएई के अधिकारियों को बिना आधार वाले दावों को दोहराने के बजाय अच्छे पड़ोसी संबंधों की जरूरतों का सम्मान करना चाहिए और इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और कानूनी सच्चाइयों को स्वीकार करना चाहिए।''
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा द्वीपों का मुद्दा उठाते हुए ईरान पर कब्जे का आरोप लगाया। खलीफा शाहीन अल मरार ने कहा कि ये द्वीप होर्मुज स्ट्रेट तक पहुंच के लिहाज से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जगह पर स्थित हैं।
अल मरार ने कहा, "ईरान ने तीन अमीराती द्वीपों पर अपना कब्जा जारी रखा है, जिसे हम स्वीकार नहीं करते। यूएई लगातार इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की मांग करता रहा है। इसे सीधे बातचीत के जरिए या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाकर सुलझाया जा सकता है।"
ईरान ने 1971 में इन द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया था। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के भी यहां सैन्य ठिकाने हैं। खाड़ी में संघर्ष बढ़ने के बीच अमेरिका ने अबू मूसा और ग्रेटर टुनब पर हमले किए हैं। अल मरार ने संघर्ष की ज्यादा जानकारी में जाए बिना समुद्री रास्तों पर जहाजों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री कानून और देशों की संप्रभुता के सिद्धांत के मुताबिक सप्लाई चेन, व्यापार और ऊर्जा की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने और उसकी रक्षा करने की जरूरत पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा कि तमाम संकटों के बावजूद यूएई ने विकास और आगे बढ़ने की अपनी कोशिश जारी रखी हैं।
अल मरार ने कहा, "इस देश का निर्माण चुनौतियों की गैरमौजूदगी में नहीं हुआ, बल्कि उनका सामना करते हुए हुआ है।"
--आईएएनएस
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