उज्जैन, काशी, नासिक और पुष्कर के तीर्थ स्थलों में मुस्लिमों के प्रवेश पर लगे रोक: भगवान दास महाराज
छतरपुर, 20 जनवरी (आईएएनएस)। निर्मोही अखाड़ा के राष्ट्रीय पंच भगवान दास महाराज ने सनातन परंपराओं के संरक्षण का हवाला देते हुए एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने उज्जैन, नासिक, वाराणसी और पुष्कर जैसे प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
उनका कहना है कि इससे तीर्थ स्थलों की पवित्रता बनी रहेगी और अनावश्यक विवादों से बचा जा सकेगा।
भगवान दास महाराज ने कहा कि भारतवर्ष मूल रूप से सनातनी देश है। यह वही भूमि है जहां भगवान राम ने जन्म लिया, जहां भगवान कृष्ण अवतरित हुए और जहां भोलेनाथ स्वयं विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि भारत ही ऐसा देश है जहां गंगा, यमुना, सरस्वती, भागीरथी, मंदाकिनी और शिप्रा जैसी पवित्र और धार्मिक नदियां बहती हैं। ऐसी धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान दुनिया के किसी और देश में नहीं है। इसलिए भारत की सनातन परंपराओं का विशेष महत्व है और उनकी रक्षा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जब देश और इसके तीर्थ स्थल सनातन परंपरा पर आधारित हैं तो हिंदू सनातनियों के तीर्थों में अन्य मजहब के लोगों का प्रवेश उचित नहीं है। उनका दावा है कि इससे कई तरह के विवाद पैदा होते हैं। कई बार लोग हिंदू बनकर दुकानें खोल लेते हैं। वहां ऐसे काम होते हैं जो सनातन परंपराओं के खिलाफ होते हैं। खान-पान और आचरण में मर्यादाओं का उल्लंघन होता है, जिससे व्रत और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है।
भगवान दास महाराज ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मुस्लिम समाज के पवित्र स्थलों, मस्जिदों और मक्का जैसे तीर्थों में हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है, उसी तरह हिंदुओं के सनातन धर्म स्थलों में मुस्लिमों का प्रवेश भी नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर हर धर्म अपने-अपने मार्ग पर चले और अपनी-अपनी परंपराओं का पालन करे तो समाज में शांति बनी रह सकती है। इस तरह का प्रतिबंध लगाना कोई गलत बात नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह की मांग बहुत पहले उठाई जानी चाहिए थी। अब जब उज्जैन और काशी जैसे शहरों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय वहां के स्थायी निवासी बन चुके हैं तो आज अचानक उन पर बैन लगाना या उन्हें दुकानें बंद करने को कहना गलत होगा। उन्होंने साफ कहा कि जो लोग वहां के निवासी बन चुके हैं, उनके आवास और रोजमर्रा के जीवन पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।
भगवान दास महाराज ने यह भी कहा कि सभी लोगों को भारत में रहने का अधिकार है और सभी को अपने-अपने धर्म और परंपराओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुओं को भी मुस्लिम धर्म स्थलों में जाकर किसी तरह का विवाद नहीं खड़ा करना चाहिए और उसी तरह मुस्लिम भाइयों को भी हिंदू मठों, मंदिरों और देवस्थानों में जाने से बचना चाहिए, ताकि किसी भी तरह का टकराव न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति सनातन धर्म को स्वीकार करके सनातनी बनकर मंदिरों और तीर्थों में जाता है, तो उस पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए। सनातन धर्म की परंपराएं सभी के लिए खुली हैं, लेकिन शर्त यही है कि व्यक्ति उन परंपराओं और मर्यादाओं को स्वीकार करे।
भगवान दास महाराज ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले अधिकांश मुसलमान भी मूल रूप से यहीं के निवासी हैं और कई के पूर्वज सनातनी हिंदू थे।
उनके अनुसार, इतिहास में जबरन धर्म परिवर्तन हुए, मंदिर तोड़े गए और मस्जिदें बनाई गईं। उन्होंने अपील की कि अगर कोई खुद को हिंदुस्तान का वासी मानता है और यह स्वीकार करता है कि उसके पुरखे सनातनी थे, तो उसे अपने मूल स्वरूप में लौट आना चाहिए और सनातन धर्म को अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गंगा, मंदाकिनी, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना, तीर्थों में जाना और मंदिरों में पूजा करना सनातन परंपरा का हिस्सा है। लेकिन अगर कोई कट्टर इस्लामी है और अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण मंदिरों में जाने से परहेज करता है, तो उसे मंदिरों में नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इससे विवाद की स्थिति बन सकती है।
भगवान दास महाराज ने कहा कि जैसे मस्जिदों में हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है और उन्हें काफिर कहा जाता है, उसी तरह हिंदू सनातनी मठों और मंदिरों में भी अन्य मजहब के लोगों का प्रवेश वर्जित होना चाहिए।
--आईएएनएस
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