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उदयनिधि स्टालिन ने फिर दिया सनातन को लेकर विवादित बयान, भाजपा बोली-चुनाव में हार से भी नहीं लिया सबक

 

चेन्नई, 12 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर 'सनातन धर्म' को लेकर विवादित बयान दिया है, जिससे सियासी घमासान मचा हुआ है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मुद्दे पर कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि ये पार्टियां वोट बैंक की राजनीति के लिए सनातन धर्म का अपमान कर रही हैं।

शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह संयोग नहीं, बल्कि वोट बैंक का प्रयोग है। उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में फिर से सनातन धर्म को खत्म करने की बात दोहराई है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने उनके बयान को हेट स्पीच बताया था, लेकिन कांग्रेस ने उस बयान का समर्थन किया था।"

उन्होंने आगे लिखा, "कांग्रेस, टीएमसी, सपा और डीएमके का एक ही प्लान है, वह यह है कि सनातन हिंदू का अपमान और वोट बैंक की दुकान।"

शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो संदेश भी जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद भी विपक्षी दलों की सोच नहीं बदली है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म के उन्मूलन की बात कही है। पहले भी उन्होंने सनातन को खत्म करने की बात कही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच बताया था, लेकिन स्टालिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, बल्कि उन्हें प्रमोशन देकर डिप्टी सीएम बना दिया गया था।

उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने कभी इस बयान की निंदा नहीं की। पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा, "फिर से सनातन को गाली दो ताकि वोट बैंक की ताली मिले, यही इनकी राजनीति बन चुकी है। जनता ने चुनाव में सबक सिखा दिया, लेकिन इसके बावजूद ये लोग सनातन को निशाना बना रहे हैं।"

दरअसल, मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने कहा, "सनातन धर्म लोगों को बांटता है, इसलिए इसे निश्चित रूप से खत्म किया जाना चाहिए।"

सितंबर 2023 में भी उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से करते हुए कहा था कि इसे केवल विरोध नहीं बल्कि जड़ से खत्म कर देना चाहिए। उनके उस बयान पर देशभर में भारी विवाद हुआ था।

वहीं, भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के राहुल गांधी हैं, जो विभाजनकारी और नफरत भरी राजनीति फैला रहे हैं। राहुल गांधी ने पवित्र 'सेंगोल' का मजाक उड़ाया था और उन्होंने राम मंदिर की 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह का अपमान किया और उसका बहिष्कार किया। राहुल गांधी, जिन्हें पिछले तीन लोकसभा चुनावों में जनता ने नकार दिया, उन्हीं की तरह उदयनिधि स्टालिन भी तमिलनाडु की जनता द्वारा दंडित किए जाने के बावजूद अपनी जहरीली बयानबाजी जारी रखे हुए हैं। आप विभाजनकारी डीएमके से और क्या उम्मीद कर सकते हैं?

सीआर केसवन ने कहा, "यह वही पार्टी है जिसने 'कार्तिकई दीपम' जलाने का विरोध किया था और जिसके मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु की जनता को दीपावली की शुभकामनाएं तक नहीं दीं। डीएमके के एक सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तो बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया था कि हिंदू धर्म न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक खतरा है। इन आदतन अपराधियों को यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि तमिलनाडु के 'राजकीय प्रतीक' में एक मंदिर का 'गोपुरम' अंकित है और तमिलनाडु की जनता अपने धर्म और अपनी भावनाओं के इस तरह के खुलेआम अपमान और तिरस्कार को न तो कभी भूलेगी और न ही कभी माफ करेगी।"

--आईएएनएस

वीकेयू/वीसी