दो का मर्डर कर बीमा क्लेम लिया, तीसरी की थी तैयारी…ऐसे गिरफ्त में आया पैसों का लालची इंसान
उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां बीमा क्लेम हड़पने के लिए दो लोगों की हत्या करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। रजपुरा थाना पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जो तीसरी हत्या की साजिश रच रहे थे। इस खौफनाक साजिश की सच्चाई तब सामने आई जब एएसपी अनुकृति शर्मा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया।
बीमा की रकम हड़पने के लिए की थी दो हत्याएं
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वेदप्रकाश, कमल सिंह, निर्देश कुमार, उदयभान, प्रेमशंकर, सुनील कुमार और ओमप्रकाश के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इन सभी ने मिलकर पहले बीमा पॉलिसी कराई, उसका प्रीमियम खुद भरा, फिर बीमाधारकों की हत्या कर दी। बाद में इसे हादसे का रूप देकर बीमा क्लेम वसूल लिया गया।
अमन की हत्या: हथौड़े से वार, 22 लाख का क्लेम
आरोपियों ने साल 2023 में 15 नवंबर को अमरोहा में 20 वर्षीय अमन की हत्या कर दी थी। अमन के सिर पर हथौड़े से वार किया गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। अमन की सौतेली मां रूपाली के खाते में 22 लाख रुपये की बीमा राशि जमा हुई, जिसे बाद में गिरोह ने आपस में बांट लिया।
सलीम की हत्या: हादसे का बहाना, 78 लाख का क्लेम
इससे पहले साल 2022 में 29 जुलाई को धनारी निवासी सलीम की भी हत्या कर दी गई थी। उसे मारकर मामले को हादसे की शक्ल दे दी गई। बीमा कंपनी से मिले 78 लाख रुपये भी आरोपियों ने आपस में बांट लिए। हैरानी की बात यह है कि सलीम की मौत के बाद गिरोह ने भंडारा आयोजित किया, जिसमें 12 गांवों के लोग शामिल हुए। यह सब कुछ बीमा क्लेम मिलने की खुशी में किया गया, ताकि शक न हो।
तीसरी हत्या की थी तैयारी
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी तीसरी हत्या की भी साजिश रच रहे थे। इस बार एक आरोपी ने अपने ही रिश्तेदार का बीमा करवाया था और उसकी हत्या की योजना बना रहा था। इससे पहले ही पुलिस को सूचना मिल गई और सातों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरोह के खिलाफ हत्या, धोखाधड़ी और साजिश की धाराएं
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य जिलों या बीमा एजेंटों से भी जुड़े हैं।
एक बड़ा सवाल: बीमा कंपनियों की निगरानी कहां?
यह पूरा मामला बीमा कंपनियों की लापरवाही और कमजोर जांच व्यवस्था की भी पोल खोलता है। दो-दो हत्याएं हो गईं और बीमा क्लेम आसानी से पास हो गए, किसी को शक तक नहीं हुआ।
निष्कर्ष
संभल का यह मामला बीमा की आड़ में खौफनाक साजिश का ऐसा उदाहरण है जो बताता है कि लोभ और लालच किस हद तक इंसान को गिरा सकता है। अब देखना होगा कि पुलिस इस केस को कितनी तेजी से कोर्ट तक पहुंचाती है और दोषियों को कड़ी सजा दिला पाती है या नहीं।