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ट्विशा शर्मा केस : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

 

भोपाल, 27 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में बुधवार को लंबी और तीखी बहस देखने को मिली। अदालत ने मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत में कई गंभीर दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर कई जगह चोट के निशान पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्विशा के सीधे हाथ की उंगली और शरीर के अन्य हिस्सों, विशेष रूप से एल्बो (कोहनी) पर भी चोट के निशान थे। सबसे अहम बात यह बताई गई कि ये चोटें मौत से पहले की थीं।

महाधिवक्ता ने अदालत से सवाल किया कि जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य शुरुआती सबूत इतने गंभीर थे, तो आखिर ट्रायल कोर्ट ने किस आधार पर गिरिबाला सिंह को जमानत दे दी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

वहीं, मामले की जांच कर रही सीबीआई की ओर से भी अदालत में सख्त रुख अपनाया गया। सीबीआई के वकील ने कहा कि एजेंसी गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत चाहती है, क्योंकि जांच में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोप है कि पहले पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह की बहन वहां मौजूद थीं। एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि क्या पोस्टमार्टम प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी।

सीबीआई ने अदालत में कहा कि इसकी जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे पूरे मामले की दिशा प्रभावित हो सकती है। एजेंसी का मानना है कि यदि पोस्टमार्टम प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप हुआ है, तो यह जांच का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

दूसरी ओर, गिरिबाला सिंह की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एनोश जॉर्ज ने अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि यदि जमानत मिलने के बाद के आचरण के आधार पर जमानत रद्द करने की मांग की जा रही थी, तो पहले ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए था। सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनके एक कानूनी अधिकार को खत्म कर दिया गया, क्योंकि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार हाईकोर्ट में उपलब्ध रहता।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन आधारों पर गिरिबाला सिंह को जमानत दी गई, उसी आधार पर देश के 90 प्रतिशत लोगों को जमानत मिल जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही जमानत देने का फैसला समझ से परे है।

तुषार मेहता ने अदालत में यह भी दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी को ठीक तरीके से नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह कानून की अच्छी जानकारी होने का फायदा उठा रही थीं। उन्हें यह पता था कि शाम के समय किसी महिला से पूछताछ नहीं की जा सकती, इसलिए उन्होंने शाम को एसएचओ को ईमेल और व्हाट्सऐप मैसेज भेजे।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम