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तुलजा भवानी मंदिर: छत्रपति शिवाजी महाराज को यहीं मिला था मुगलों के खिलाफ जीत का आशीर्वाद

 

नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। देशभर में मौजूद शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों का इतिहास हमारे मूल ग्रंथ और कहानियों से जुड़ा है। महाराष्ट्र में मां भगवती का ऐसा मंदिर है, जहां के चमत्कार तो भक्तों को मंदिर तक खींच ही लाते हैं, लेकिन इस मंदिर ने भारत का इतिहास लिखने में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। हम बात कर रहे हैं मां तुलजा भवानी मंदिर की।

महाराष्ट्र के धाराशिव (पूर्व में उस्मानाबाद था) जिले के तुलजापुर में मां भवानी का शक्तिशाली शक्तिपीठ मंदिर तुलजा भवानी मौजूद है। इस मंदिर में मां की पूजा एक अमूर्त प्रतिमा के रूप में नहीं की जाती है, बल्कि उन्हें सजीव मानकर पूजा जाता है। इसके पीछे की वजह है कि मां का स्वयं चलना। माना जाता है कि साल में 21 दिन मां खुद मंदिर के गर्भगृह से निकलकर अपने कक्ष में सोने के लिए जाती हैं। मंदिर में मौजूद मां की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, जिनका पूजन सजीव मानकर किया जाता है। ये देश की पहली प्रतिमा है, जो शालिग्राम पत्थर से बनी है।

मां तुलजा भवानी की गिनती देश के सबसे शक्तिशाली मंदिरों में की जाती है क्योंकि यहीं छत्रपति शिवाजी महाराज को मुगल सेना से लड़ने के लिए चमत्कारी तलवार मिली थी। दरअसल, मां तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी हैं और हमेशा युद्ध पर जाने से पहले शिवाजी महाराज तुलजा देवी का आशीर्वाद जरूर लेते थे।

कहा जाता है कि जब वह अकेले स्वराज के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उन्होंने मां से जीत की प्रार्थना की थी। मां तुलजा ने प्रकट होकर उन्हें भवानी तलवार भेंट की थी। यह मंदिर उसी जीवंत आस्था का प्रमाण है, जिसने इतिहास भी बदला है।

मां तुलजा भवानी मंदिर महाराष्ट्र के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है और हर साल नवरात्रि के समय मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां तुलजा भवानी शत्रुओं को परास्त करने का वरदान देती हैं। मंदिर के इतिहास की बात करें तो मंदिर को हेमाड़पंती स्थापत्य शैली से बनाया गया है और उसकी स्थापना 12वीं सदी में कदंब वंश के मराठा महामंडलेश्वर मरादेव ने कराया था।

--आईएएनएस

पीएस/वीसी