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ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ वीडियो में देंखे जांच शुरू की

 

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत, चीन और अन्य 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू कर दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया था।

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‘सेक्शन 301’ अमेरिका को अधिकार देता है कि वह उन देशों पर एकतरफा टैक्स या टैरिफ बढ़ा सके, जो अमेरिकी कंपनियों के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हों। ट्रम्प प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों का इस्तेमाल कर, टैरिफ के दबाव को वापस लाने की तैयारी में है।

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने बताया कि इस जांच के परिणामस्वरूप इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिकी कंपनियों और उद्योगों की रक्षा के लिए जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सेक्शन 301’ के तहत शुरू की गई यह जांच, अमेरिका की ट्रेड नीति में व्यापक बदलाव का संकेत देती है। इससे न केवल भारत और चीन बल्कि यूरोपीय देशों और मैक्सिको जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ अमेरिकी आर्थिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नए टैरिफ लगाए जाते हैं, तो वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, भारत और चीन जैसे बड़े निर्यातक देशों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव आएगा।

अमेरिका की यह नई पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही अस्थिरता और अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। टैरिफ बढ़ाने के कदम से व्यापारिक तनाव बढ़ सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को लागत बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रम्प प्रशासन का यह रुख अमेरिका के घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इससे वैश्विक व्यापार नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जटिलताएं बढ़ने की संभावना भी है।

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका की इस रणनीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी कंपनियों को विदेशी बाजारों में अन्य देशों द्वारा अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े। भारत और चीन के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है, क्योंकि दोनों देश अमेरिकी बाजार में बड़े निर्यातक हैं।

इस मामले की आगे की प्रक्रिया और संभावित टैरिफ के स्तर पर सभी देशों की नजरें टिकी हैं। गर्मियों तक नए टैरिफ लागू होने की स्थिति में, वैश्विक व्यापार और आर्थिक संतुलन पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करना आवश्यक होगा।