पानी की कमी से परेशान गांव ने लगाया 'बिक्री के लिए' बोर्ड, वीडियो में जाने कीमत मांगी सिर्फ पानी
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में पानी का संकट अब लोगों के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। माढा तहसील के तुलशी गांव के ग्रामीण कई सालों से पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीणों ने अपना गांव बेचने का बोर्ड लगा दिया है। हालांकि इस गांव की कीमत पैसे नहीं, बल्कि सिर्फ पानी रखी गई है। गांव में लगाए गए बोर्ड पर लिखा है- 'गांव बिक्री के लिए, कीमत-पानी।' इसके साथ ही ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर अन्याय कब तक सहन करना पड़ेगा।
तुलशी गांव की आबादी करीब 7 हजार बताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक हर साल गर्मी के मौसम में पानी का संकट गहरा जाता है। इस बार भी गांव के खेत और कुएं सूख चुके हैं। पानी के स्थानीय स्रोतों के खत्म होने के कारण लोगों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर गांव की रोजमर्रा की जिंदगी और सामाजिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
पानी के संकट से युवाओं की शादी पर भी असर
तुलशी के सरपंच शरद मोरे ने गांव में लंबे समय से चले आ रहे जल संकट को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि पानी की समस्या के कारण गांव के करीब 350 युवकों की शादी नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में शादी के लिए परिवार कई तरह की परिस्थितियों को देखते हैं और लगातार पानी की कमी भी एक बड़ी चिंता बन गई है।
सरपंच के मुताबिक गांव में हर साल पानी की कमी रहती है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने के लिए गांव के बाहर 'गांव बिक्री के लिए, कीमत-पानी' का बोर्ड लगाया है। उनका कहना है कि यह बोर्ड वास्तव में गांव बेचने की कोशिश नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्या को लेकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का एक तरीका है।
265 तालुकों में सूखा घोषित
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य की कुल 358 तहसीलों में से 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया है। सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज की घोषणा भी की गई है। ऐसे में तुलशी गांव के लोगों को उम्मीद है कि उन्हें भी जल संकट से राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।ग्रामीणों की मांग है कि गांव के लिए स्थायी जल स्रोत की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें हर साल टैंकरों पर निर्भर न रहना पड़े। पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने पर खेती, रोजगार और ग्रामीण जीवन पर इसका असर और बढ़ सकता है।
तुलशी गांव में लगाया गया 'बिक्री के लिए' का बोर्ड अब जल संकट की गंभीरता का प्रतीक बन गया है। ग्रामीणों का संदेश साफ है कि उन्हें गांव छोड़ने या उसे बेचने की नहीं, बल्कि अपने गांव में पर्याप्त पानी की जरूरत है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।