त्रिपुरा में आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों के सदस्यों ने शुरू किया 72 घंटे का विरोध प्रदर्शन
अगरतला, 12 जून (आईएएनएस)। त्रिपुरा में प्रतिबंधित उग्रवादी समूहों एटीटीएफ और एनएलएफटी छोड़कर मुख्य धारा में लौटे लोगों ने 72 घंटे का सड़क और रेल जाम शुरू किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार के साथ दो साल से भी पहले हुए समझौते के तहत पुनर्वास के वादे पूरे नहीं किए गए हैं। वे आजीविका में मदद और आर्थिक सहायता समेत लंबित लाभों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार सुबह एक नेशनल हाईवे जाम कर दिया। इसके अलावा, ट्रेनों की रफ्तार भी रोक दी। अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने रेलवे पटरियों पर बैठकर विरोध जताया।
एनएलएफटी सदस्य थॉमस उचॉय ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "विरोध-प्रदर्शन के बारे में हमने असल में लगभग 7 दिन पहले ही सूचना दे दी थी। गुरुवार हमारे विकास मंत्री के साथ बातचीत हुई, लेकिन उससे हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए। हम इसे मानने को तैयार नहीं हैं।
यह विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुए हैं, जब आत्मसमर्पण करने वाले लोगों के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के बीच बातचीत के दो दौर भी गतिरोध को खत्म करने में नाकाम रहे। गुरुवार को सिविल सचिवालय में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में राज्य मंत्री विकास देबबर्मा और आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी गुटों के प्रतिनिधि शामिल हुए, ताकि अहम लंबित मुद्दों पर चर्चा की जा सके। हालांकि, वह असफल रही।
प्रदर्शनकारी पुनर्वास पैकेज के तहत किए गए वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं, जिनमें पुनर्वास के रुके हुए उपाय, आजीविका के अवसर, आर्थिक मदद और अन्य लाभ शामिल हैं। सरकार से बातचीत न बनने की स्थिति में आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के एक गुट ने 12 जून को सड़क जाम करने का ऐलान किया था।
उन्होंने कहा था कि 12 जून को सड़क जाम करने समेत प्रस्तावित आंदोलन का ऐलान उनकी उन मांगों को मनवाने के लिए किया गया, जो लंबे समय से लंबित हैं और जिन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
--आईएएनएस
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