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टॉलीगंज विधानसभा सीट: तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में 25 साल से कोई दल नहीं लगा पाया सेंध, भाजपा पहली जीत की तलाश में

 

कोलकाता, 21 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच 'मिनी मुंबई' कहे जाने वाले टॉलीगंज पर भी राजनीतिक रंग चढ़ने लगा है। तृणमूल कांग्रेस यहां छठवीं बार चुनाव जीतने की हरसंभव कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा के अलावा वाम दल और कांग्रेस अपने पांव जमाने के प्रयास में जुटी हैं। यहां भाजपा को कभी जीत नहीं मिली और कांग्रेस भी 2001 के बाद भी कभी वापसी नहीं कर पाई है।

टॉलीगंज दक्षिण कोलकाता का प्रमुख और समृद्ध इलाका है। टॉलीगंज के निकट लेक मार्केट कोलकाता के प्रमुख बाजारों में गिना जाता है। हाटीबागान, मानिकतला, सियालदह और गरियाहाट बाजारों के साथ यह शहर की बड़ी बाजार व्यवस्था का हिस्सा है।

ट्रांसपोर्ट के लिहाज से टॉलीगंज के उत्तर में पूर्वी रेलवे की दक्षिणी उपनगरीय लाइन, पूर्व में लेक गार्डन्स और गोल्फ ग्रीन, दक्षिण में पश्चिम पुटियारी और पुरबा पुटियारी व पश्चिम में बेहाला स्थित हैं। यह इलाका परिवहन के लिहाज से अत्यंत सुदृढ़ है। यहां कोलकाता मेट्रो के महानायक उत्तम कुमार मेट्रो स्टेशन और नेताजी मेट्रो स्टेशन हैं।

महानायक उत्तम कुमार मेट्रो स्टेशन वर्ष 1984 से 2009 तक मेट्रो का टर्मिनल स्टेशन रहा। बाद में मेट्रो सेवा का विस्तार न्यू गरिया तक किया गया। इसके अतिरिक्त टॉलीगंज रेलवे स्टेशन बजबज खंड पर स्थित है। ट्राम सेवा भी इस क्षेत्र को बालीगंज और सेंट्रल कोलकाता से जोड़ती है। कोलकाता में पहली इलेक्ट्रिक ट्राम 1902 में एस्प्लेनेड से खिदिरपुर तक चली थी और 1903 में इसकी पटरियां टॉलीगंज तक बिछाई गईं।

टॉलीगंज में कई महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं। इनमें टॉलीगंज क्लब, रॉयल कलकत्ता गोल्फ क्लब (आरसीजीसी), आईटीसी संगीत अनुसंधान अकादमी और इंद्रपुरी फिल्म स्टूडियो प्रमुख हैं। यहां पुराना एनएच1 स्टूडियो भी स्थित है और हाल के वर्षों में कई नए स्टूडियो भी खुले हैं।

टॉलीगंज का इतिहास कोलकाता के दक्षिणी किनारे पर, आदि गंगा नहर के ठीक उत्तर में स्थित होने से जुड़ा है। कहा जाता है कि 18वीं शताब्दी में यहां यूरोपीय शैली के बगीचे वाले घर बने हुए थे। उस समय पुराने कलकत्ता के केंद्रीय भागों में रहने वाले यूरोपीय लोग शांत उपनगरीय क्षेत्रों में अपने विला बनवाते थे। इस क्षेत्र का नाम कर्नल विलियम टॉली के नाम पर रखा गया। 1806 में वेल्लोर विद्रोह के बाद टीपू सुल्तान का बेटा गुलाम मोहम्मद इस क्षेत्र में बस गया। अंग्रेजों ने 19वीं शताब्दी में टॉलीगंज क्लब और टॉलीगंज गोल्फ क्लब को अपना संरक्षण दिया।

राजनीतिक की बात करें तो टॉलीगंज में शुरुआत में तीन विधानसभा सीटें थीं, जिसे 1957 में एक सीट के रूप में बनाया गया। 1991 तक यहां वाम दलों का दबदबा रहा, हालांकि 1972 में कांग्रेस ने वापसी की थी और उसके बाद 1996 में उसे आखिरी बार जीत मिली। 2001 के बाद से यह तृणमूल कांग्रेस का गढ़ बन चुका है। पार्टी ने यहां से लगातार पांच बार जीत हासिल की है।

--आईएएनएस

डीसीएच/वीसी