चैत्र नवरात्रि का छठा दिन आज, जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि और विशेष महत्व
चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का आज छठा न है, जो आदिशक्ति के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित माना जाता है। देशभर में श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर मां से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी को शक्ति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। पुराणों में उल्लेख है कि देवी कात्यायनी ने ही महिषासुर का वध किया था, जिसके कारण उन्हें दानवों की संहारक भी कहा जाता है। यही कारण है कि इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से मां कात्यायनी की उपासना करते हैं, उनके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए इस दिन की पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि अविवाहित कन्याएं यदि विधि-विधान से मां की आराधना करें, तो उन्हें योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि
छठे दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ-सुथरा रखें। मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें फूल, अक्षत, कुमकुम और धूप-दीप अर्पित करें। इसके बाद मां के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
भोग और विशेष अर्पण
इस दिन मां कात्यायनी को शहद (हनी) का भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है। शहद का भोग लगाने से व्यक्ति के जीवन में मधुरता आती है और संबंधों में प्रेम बढ़ता है। इसके अलावा फल और मिठाई भी अर्पित की जा सकती है।
धार्मिक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, नवरात्रि का हर दिन आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। मां कात्यायनी की पूजा से साहस, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है। यह दिन विशेष रूप से युवाओं और अविवाहितों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।देशभर के मंदिरों में आज विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर मां कात्यायनी के दर्शन कर रहे हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना कर रहे हैं। नवरात्रि का यह छठा दिन भक्ति, शक्ति और आस्था का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देता है।