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टीएमसी को टूटने से बचाना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती: राजीव रंजन प्रसाद

 

पटना, 2 जून (आईएएनएस)। जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति, तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक हालात, ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ और उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को लेकर पार्टी के भीतर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुई विधायक दल की बैठक में विधायकों की कम उपस्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का विश्वास अब ममता बनर्जी के नेतृत्व में नहीं रह गया है।

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद टीएमसी को लगातार झटके लग रहे हैं। बड़ी संख्या में निगम पार्षद पार्टी छोड़ चुके हैं और कई वरिष्ठ नेता भी खुलकर असंतोष जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि काकोली घोष जैसे प्रमुख नेताओं ने ममता बनर्जी के खिलाफ खुला रुख अपनाया है। शांतनु सेन समेत कई अन्य नेताओं के नाम हैं, जो पार्टी नेतृत्व के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में टीएमसी को एकजुट बनाए रखना और संगठन को टूटने से बचाना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि लंबे समय तक भय और राजनीतिक दबाव के कारण अनेक जनप्रतिनिधि टीएमसी के साथ बने रहे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद अब उनमें पार्टी से निकलने की बेचैनी दिखाई दे रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यह असंतोष आने वाले समय में टीएमसी के भीतर बड़ी टूट का कारण बन सकता है।

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि ममता बनर्जी के लंबे शासनकाल के दौरान टीएमसी नेताओं पर अत्याचार और उत्पीड़न के जो आरोप लगते रहे हैं, उनके खिलाफ जनता में व्यापक नाराजगी है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर टीएमसी नेताओं के विरोध के रूप में जो घटनाएं सामने आ रही हैं, उन्हें इसी नाराजगी की स्वाभाविक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए।

टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा कि हालांकि अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इसके बावजूद यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में टीएमसी नेताओं के खिलाफ विरोध और हंगामे की घटनाएं पार्टी के लिए आत्ममंथन का विषय है।

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2029 तक परिसीमन और लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हुए राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय है। उन्होंने कहा कि जनता दल (यूनाइटेड) शुरू से ही सैद्धांतिक रूप से इस विचार के समर्थन में रही है।

उन्‍होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होने के कारण केंद्रीय सुरक्षा बलों की बार-बार तैनाती करनी पड़ती है और लगातार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता विकास योजनाओं तथा नीतिगत निर्णयों के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न करती है। यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो इससे समय, संसाधनों और सरकारी खर्च की बचत होगी तथा प्रशासनिक कार्यों में भी निरंतरता बनी रहेगी।

उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ हो रहे एनकाउंटर और उस पर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के संबंध में जेडीयू नेता ने विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव और अबू आजमी जैसे नेताओं के बयानों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपराधियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, जबकि ऐसा क्यों किया जा रहा है, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का अध्ययन किए बिना बयानबाजी करना उचित नहीं है।

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि अपराधियों की कोई जाति या धर्म नहीं होता और कानून के दायरे में सभी अपराधियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि अपराध और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को जाति और धर्म के चश्मे से देखने के बजाय उत्तर प्रदेश में स्थापित कानून के शासन को मजबूत करने में सहयोग करना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं और विपक्ष को इन प्रयासों का राजनीतिक विरोध करने के बजाय सकारात्मक सहयोग देना चाहिए।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी