प्रतापगढ़ में चिकित्सा व्यवस्थाओं पर टीकाराम जूली ने उठाए सवाल, धरियावद में डॉक्टरों की कमी से मौतें चिंताजनक
राजस्थान में चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। Tika Ram Jully ने प्रतापगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को बेहद खराब बताते हुए सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने खास तौर पर धरियावद क्षेत्र में चिकित्सकों की कमी को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि डॉक्टरों के अभाव में हो रही मौतें बेहद चिंताजनक हैं।
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि प्रतापगढ़ जिले, विशेषकर धरियावद क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल स्थिति में हैं और आमजन को पर्याप्त चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उनका कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा, जिसका खामियाजा लोगों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है। धरियावद जैसे इलाकों में डॉक्टरों के रिक्त पद लंबे समय से चिंता का विषय बने हुए हैं, लेकिन समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
टीकाराम जूली ने कहा कि चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को रेफर किया जा रहा है या समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा, जिससे हालात चिंताजनक बनते जा रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रतापगढ़ और विशेषकर धरियावद क्षेत्र में तत्काल डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए, अस्पतालों में संसाधन बढ़ाए जाएं और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि लोगों की जान से जुड़ा यह मामला राजनीति से ऊपर उठकर गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठे इन सवालों के बाद एक बार फिर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में चिकित्सा ढांचे की स्थिति चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है और इसे दूर करने के लिए ठोस नीति और प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है।
धरियावद क्षेत्र में चिकित्सकों की कमी से मौतों को लेकर जताई गई चिंता ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर भी लंबे समय से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की मांग उठती रही है।
फिलहाल टीकाराम जूली के इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रतापगढ़ की चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवाल अब सरकार के लिए जवाबदेही का विषय बनते दिख रहे हैं।