गर्मी में तेजी से घटा तालाबों का जलस्तर, वीडियो में जाने देश के 166 प्रमुख जलाशयों में केवल 24.75% पानी शेष
देश में गर्मी अपने चरम पर पहुंचते ही जल संकट की चिंता बढ़ने लगी है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई महीने के दौरान देश के प्रमुख जलाशयों और तालाबों में पानी का स्तर तेजी से घटा है। बढ़ते तापमान और पानी की अधिक खपत के कारण जल भंडारण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
एक महीने में 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के अंतिम सप्ताह तक कुल लाइव स्टोरेज घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर रह गया है। यह इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का केवल 24.75 प्रतिशत है।आंकड़े बताते हैं कि मई की शुरुआत से लेकर महीने के अंत तक जलाशयों में उपलब्ध पानी में करीब 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी, बढ़ती सिंचाई जरूरतों और घरेलू उपयोग के कारण जल भंडारण तेजी से घट रहा है।
अल नीनो और सूखे की आशंका ने बढ़ाई चिंता
जल संकट की यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हाल ही में अल नीनो के प्रभाव के चलते कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका जताई है। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो जलाशयों में पानी की उपलब्धता और प्रभावित हो सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि जलाशयों का मौजूदा स्तर आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति, कृषि और बिजली उत्पादन पर असर डाल सकता है।
15 बांधों में जल भंडारण सामान्य से आधा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश के कम से कम 15 प्रमुख बांधों में पानी का स्टॉक सामान्य स्तर के मुकाबले आधे से भी कम रह गया है। इससे उन क्षेत्रों में जल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है, जहां पेयजल और सिंचाई के लिए इन जलाशयों पर निर्भरता अधिक है।जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए और मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो आने वाले महीनों में कई राज्यों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ सकता है।
जल संरक्षण की जरूरत
बढ़ती गर्मी और घटते जल भंडारण के बीच विशेषज्ञ नागरिकों से पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील कर रहे हैं। वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और भूजल के संतुलित उपयोग जैसे उपायों को अपनाकर संभावित जल संकट के प्रभाव को कम किया जा सकता है।फिलहाल देश की नजर आगामी मानसून पर टिकी है, क्योंकि अच्छी बारिश ही जलाशयों में घटते जल स्तर को दोबारा संतुलित कर सकती है और संभावित जल संकट से राहत दिला सकती है।