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मिडिल ईस्ट और यूक्रेन में युद्ध जल्द खत्म हो, वीडियो में देंखे पीएम मोदी, सैन्य संघर्ष से समाधान संभव नहीं

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में मिडिल ईस्ट और यूक्रेन में जारी युद्ध को जल्द समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य संघर्ष से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। भारत हमेशा से शांति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है और आगे भी वैश्विक शांति के प्रयासों में सहयोग करता रहेगा।

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प्रधानमंत्री मोदी ने यह बयान फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस बयान में दिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा की।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय नियमों में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सोच है कि दुनिया में बढ़ते तनाव और संघर्षों को खत्म करने के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम इस बात पर सहमत हैं कि केवल सैन्य संघर्ष के जरिए किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। दुनिया के सामने जो भी विवाद हैं, उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा से बातचीत, सहयोग और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थायी शांति स्थापित करने का पक्षधर रहा है।

पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। यूक्रेन में रूस के साथ जारी संघर्ष अभी भी खत्म नहीं हुआ है और इसके कारण वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा है।

इसके अलावा मिडिल ईस्ट में भी हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका समर्थित इजराइल और ईरान के बीच पिछले छह दिनों से संघर्ष जारी है। इस जंग ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और कई देशों ने इसे लेकर चिंता जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस संघर्ष में भारी सैन्य कार्रवाई हुई है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक इस जंग के दौरान 5000 से ज्यादा बम गिराए जा चुके हैं। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही और मानवीय संकट की आशंका बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।

ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री मोदी का शांति और कूटनीति पर जोर देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह कहता आया है कि किसी भी युद्ध या संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत और सहयोग से ही संभव है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर मिडिल ईस्ट और यूक्रेन के हालात पर बनी हुई है। कई देश और वैश्विक संगठन संघर्ष को खत्म करने और शांति बहाल करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। भारत ने भी एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।