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OBC क्रीमीलेयर नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से IAS की ट्रेनिंग अटकी, वीडियो में जाने केंद्र ने मांगी स्थिति स्पष्ट करने की मांग

 

ओबीसी क्रीमीलेयर के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासनिक सेवाओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। इसका असर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की ट्रेनिंग पर भी पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, अगस्त के तीसरे सप्ताह से शुरू होने वाली ट्रेनिंग करीब दो महीने से अटकी हुई है। केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट करे कि उसके फैसले को किस तरह लागू किया जाना चाहिए और इसका प्रभाव किन उम्मीदवारों पर पड़ेगा।इस मामले में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने रविवार शाम एक नोट जारी या। इसमें बताया या कि सरकार ने फैसले के क्रियान्वयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने सिविल सेवा परीक्षा के पिछले 14 वर्षों के उम्मीदवारों से जुड़े आंकड़े जुटाकर विभिन्न पहलुओं का आकलन किया है। केंद्र सरकार का कहना है कि फैसले के प्रभाव और उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन को स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि आगे की प्रक्रिया में किसी तरह की अस्पष्टता न रहे।

11 मार्च के फैसले के बाद पैदा हुआ असमंजस

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सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को ओबीसी क्रीमीलेयर के नियमों से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि फैसले का प्रभाव केवल नई भर्तियों पर लागू होगा या पहले से पूरी हो चुकी भर्तियों पर भी पड़ेगा।इसी सवाल को लेकर प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। मामला सिविल सेवा परीक्षा के उन उम्मीदवारों से भी जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति या सेवा संबंधी प्रक्रिया पर इन नियमों का असर पड़ सकता है। ऐसे में फैसले की व्याख्या और उसके लागू होने की सीमा को लेकर स्पष्टता जरूरी मानी जा रही है।ओबीसी क्रीमीलेयर के नियम अन्य पिछड़ा वर्ग के उन अभ्यर्थियों की पात्रता निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जिन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है। इसलिए नियमों की व्याख्या में बदलाव या स्पष्टीकरण का असर चयन प्रक्रिया और संबंधित उम्मीदवारों की स्थिति पर पड़ सकता है।

केंद्र सरकार ने 24 अगस्त को दाखिल की याचिका

इस मामले में केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सरकार ने अदालत से फैसले को लागू करने के तरीके को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया। इसके बाद 24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत का अंतिम फैसला अभी लंबित है। इसी वजह से फैसले के व्यावहारिक प्रभाव को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। केंद्र सरकार ने सिविल सेवा परीक्षा के 14 वर्षों के उम्मीदवारों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है, ताकि अदालत के सामने संबंधित पहलुओं को रखा जा सके।

IAS अधिकारियों की ट्रेनिंग पर पड़ा असर

इस विवाद का असर IAS अधिकारियों की ट्रेनिंग पर भी देखने को मिल रहा है। ट्रेनिंग अगस्त के तीसरे सप्ताह में शुरू होनी थी, लेकिन ओबीसी क्रीमीलेयर नियमों की व्याख्या को लेकर बनी स्थिति के कारण इसमें देरी हुई है।मामले में अदालत के स्पष्टीकरण के बाद ही आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है। इससे संबंधित उम्मीदवारों और प्रशासनिक सेवाओं में चयनित अभ्यर्थियों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।खबर में आगे यह भी उल्लेख है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन UPSC अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद संबंधित नियमों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इस राहत का दायरा और किन उम्मीदवारों को इसका लाभ मिलेगा, यह स्पष्ट करने के लिए अदालत के आदेश की पूरी जानकारी जरूरी है।