अमरनाथ गुफा में हिम शिवलिंग का आकार घटकर 4 फीट हुआ, फुटेज में देंखे पहले दिन 12 हजार श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन
अमरनाथ यात्रा के बीच पवित्र हिम शिवलिंग के आकार में कमी देखने को मिली है। ताजा तस्वीरों के अनुसार, प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिमलिंग अब करीब 4 फीट का रह गया है। इससे पहले मई और जून के अंत में इसकी ऊंचाई इससे काफी अधिक थी। वहीं, यात्रा के पहले दिन 12 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए।
7 फीट से घटकर 4 फीट तक पहुंचा हिम शिवलिंग
23 मई को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों द्वारा जारी तस्वीरों में अमरनाथ गुफा के भीतर बने हिम शिवलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट दिखाई दे रही थी। इसके बाद 29 जून को प्रथम पूजा के समय भी हिमलिंग 5 फीट से अधिक ऊंचा था। अब 3 जुलाई को सामने आई नई तस्वीरों में हिम शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 4 फीट नजर आ रही है। इतना ही नहीं, इसकी चौड़ाई में भी कमी आई है। हालांकि, यह प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
यात्रा के पहले दिन 12 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
शनिवार को अमरनाथ यात्रा का दूसरा दिन है। यात्रा के पहले दिन करीब 12 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए। आज दूसरा जत्था भी गुफा तक पहुंचेगा, जबकि तीसरा जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो चुका है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम कर रही हैं।
प्राकृतिक रूप से बनता है अमरनाथ का हिम शिवलिंग
अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर तैयार नहीं किया जाता। यह पूरी तरह प्राकृतिक रूप से बनने वाली आइस स्टैलेग्माइट (Ice Stalagmite) है।
गुफा की छत से लगातार टपकने वाला पानी अत्यधिक ठंड के कारण जमता जाता है और धीरे-धीरे बर्फ का शिवलिंग बन जाता है। यह प्रक्रिया ठीक उसी तरह होती है, जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में खनिज पदार्थों के जमने से स्टैलेग्माइट का निर्माण होता है।
हर साल बदलता है हिमलिंग का आकार
विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ के हिम शिवलिंग का आकार हर वर्ष मौसम, तापमान और गुफा में पानी की उपलब्धता के अनुसार बदलता रहता है। कभी यह अधिक ऊंचा बनता है तो कभी अपेक्षाकृत छोटा रह जाता है। यही प्राकृतिक विशेषता अमरनाथ के हिम शिवलिंग को अन्य धार्मिक प्रतीकों से अलग और अद्वितीय बनाती है।
श्रद्धालुओं के लिए यह केवल बर्फ का ढांचा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है, जिसके दर्शन के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों लोग कठिन यात्रा कर बाबा बर्फानी के दरबार पहुंचते हैं।