देश का सबसे लंबा ट्रेन रूट: 57 स्टेशनों को छूते हुए 4200 KM का सफर तय करती है यह ट्रेन, जानिए इसकी खासियतें
अगर आपको एक ही ट्रेन में लगातार चार दिन और चार रातें बितानी पड़ें, तो कैसा लगेगा? खिड़की के बाहर हर कुछ घंटों में बदलती भाषा, बदलता खान-पान और अलग-अलग तरह का भूगोल… यह सफर किसी ट्रेन यात्रा से कम और पूरे भारत को करीब से देखने जैसा ज्यादा है।
हम बात कर रहे हैं विवेक एक्सप्रेस की, जो देश की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन के रूप में जानी जाती है।
डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक का लंबा सफर
आमतौर पर लोगों को लगता है कि भारत की सबसे लंबी ट्रेन यात्रा कश्मीर से कन्याकुमारी के बीच होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। विवेक एक्सप्रेस असम के डिब्रूगढ़ से चलकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक पहुंचती है।
स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती के मौके पर साल 2012 में इस ट्रेन को शुरू किया गया था। इसी वजह से इसका नाम विवेक एक्सप्रेस रखा गया।
पटरियों पर दिखता है पूरा भारत
विवेक एक्सप्रेस का सफर सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं है। यह भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को करीब से देखने का मौका देता है।
करीब 4,200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करने वाली यह ट्रेन कई राज्यों से गुजरती है और रास्ते में दर्जनों स्टेशनों पर रुकती है। सफर की शुरुआत असम से होती है और ट्रेन पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश समेत कई इलाकों से गुजरते हुए दक्षिण भारत के तमिलनाडु में कन्याकुमारी तक पहुंचती है।
टाइमटेबल के हिसाब से इस यात्रा में करीब 75 घंटे लगते हैं, हालांकि वास्तविक यात्रा का समय ट्रेन की स्थिति और देरी के आधार पर करीब चार दिन तक पहुंच सकता है।
सफर के दौरान कई बार बदलते हैं लोको पायलट
इतनी लंबी दूरी एक ही लोको पायलट या क्रू के लिए तय करना संभव नहीं होता। इसलिए रास्ते में अलग-अलग जगहों पर लोको पायलट और अन्य रनिंग स्टाफ बदले जाते हैं।
यानी ट्रेन भले ही वही रहती है, लेकिन इतने लंबे सफर के दौरान इसे चलाने वाली टीम कई बार बदलती रहती है।
हर राज्य के साथ बदल जाता है खाने का स्वाद
इस यात्रा की सबसे खास बातों में से एक है भारत के अलग-अलग राज्यों के खान-पान को महसूस करना।
असम की चाय से लेकर बंगाल के स्वाद, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के अलग-अलग व्यंजन और फिर दक्षिण भारत में इडली, डोसा जैसे लोकप्रिय खाने—सफर आगे बढ़ने के साथ थाली का स्वाद भी बदलता जाता है।
ई-कैटरिंग जैसी सुविधाओं के जरिए यात्रियों को कई स्टेशनों पर स्थानीय भोजन मंगाने का विकल्प भी मिल सकता है।
रोमांच के साथ चुनौतियां भी
चार दिन से ज्यादा लंबा ट्रेन सफर सुनने में जितना रोमांचक लगता है, उतना ही धैर्य भी मांगता है। लंबे सफर के दौरान नेटवर्क की समस्या, ट्रेन में साफ-सफाई और पानी से जुड़ी दिक्कतें या कभी-कभी ट्रेन की देरी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
लेकिन अगर आपको सिर्फ जल्दी मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि रास्ते में भारत को देखना और महसूस करना है, तो विवेक एक्सप्रेस का सफर एक अलग अनुभव हो सकता है।
असम से शुरू होकर कन्याकुमारी तक पहुंचने वाली यह यात्रा आपको दिखाती है कि कुछ हजार किलोमीटर के सफर में भारत की भाषा, संस्कृति, मौसम, खान-पान और नजारे किस तरह बदलते जाते हैं।
यही वजह है कि विवेक एक्सप्रेस का सफर सिर्फ एक रेल यात्रा नहीं, बल्कि पटरियों पर पूरे भारत को करीब से देखने का अनुभव बन जाता है।