महिला आरक्षण पर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में केंद्र सरकार, वीडियो में जाने संसद का विशेष सत्र बुलाने की चर्चा; लोकसभा सीटें बढ़ाने के लिए 3 बिल होंगे पेश
केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाने से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की चर्चा है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। इन विधेयकों के जरिए महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी बताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से विशेष सत्र की तारीख और विधेयकों के एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
पहले प्रयास में नहीं मिला था दो-तिहाई बहुमत
इससे पहले 16 और 17 अप्रैल को हुई कोशिश के दौरान सरकार लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सफल नहीं रही थी। अब चर्चा है कि सरकार ने विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी संख्याबल जुटाने की दिशा में काम किया है।सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, विशेष सत्र बुलाने से लगभग एक सप्ताह पहले इसकी सूचना दी जा सकती है। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन अब तक उसका सत्रावसान नहीं किया गया है। इसी वजह से विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलों को बल मिल रहा है।
लोकसभा में बिल पास कराने के लिए 360 वोट जरूरी
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से तीन सीटें खाली बताई गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास 318 सांसद हैं। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इसके लिए 360 वोटों की आवश्यकता होगी। ऐसे में NDA को अन्य दलों के सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के 22 सांसदों के समर्थन की स्थिति में विधेयक के पक्ष में 340 सांसद हो सकते हैं। इसके बावजूद 360 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए लगभग 20 और सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।हालांकि, किसी संविधान संशोधन विधेयक के लिए आवश्यक बहुमत की गणना सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के आधार पर होती है। इसलिए वास्तविक जरूरत मतदान के समय सदन की स्थिति पर निर्भर करेगी।
राज्यसभा में भी समर्थन जुटाना चुनौती
राज्यसभा में भी सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए दूसरे दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उच्च सदन में कुल 245 सीटें हैं, जिनमें से तीन खाली हैं। NDA के पास 153 सांसद बताए गए हैं।दिए गए आंकड़ों के आधार पर विधेयक को पारित कराने के लिए 162 मतों की जरूरत बताई गई है। ऐसे में सरकार को छोटी पार्टियों और अन्य दलों के लगभग नौ सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।इस तरह लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी संख्याबल का प्रबंधन सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा। विधेयकों को पारित कराने के लिए सहयोगी दलों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों की भूमिका भी अहम हो सकती है।
तीन विधेयकों से क्या बदल सकता है?
प्रस्तावित विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा की सीटों में संभावित बढ़ोतरी, परिसीमन की प्रक्रिया और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनी प्रावधानों में बदलाव करना बताया जा रहा है। सरकार की योजना इन बदलावों के माध्यम से महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की है।महिला आरक्षण लागू होने से लोकसभा और संबंधित विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, आरक्षण का वास्तविक स्वरूप, सीटों का निर्धारण और लागू होने की समयसीमा विधेयकों के अंतिम प्रावधानों पर निर्भर करेगी।फिलहाल, संसद के विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा और तीनों विधेयकों के अंतिम स्वरूप पर रहेगी।