केंद्र सरकार ने कचरा प्रबंधन प्रणाली में किया संशोधन, अब चार श्रेणियों में होगा कचरा अलग करना अनिवार्य
केंद्र सरकार ने देश में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से कचरा प्रबंधन प्रणाली में बड़ा संशोधन किया है। 1 अप्रैल से लागू इस नए नियम के तहत अब सभी घरों को अपने कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले लागू दो-बिन प्रणाली को समाप्त कर अब चार-बिन व्यवस्था लागू की गई है, जिसे पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा एक महत्वपूर्ण और सख्त कदम माना जा रहा है।
सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब हर घर में चार अलग-अलग डस्टबिन रखने होंगे, जिनमें गीला कचरा (Wet Waste), सूखा कचरा (Dry Waste), सैनिटरी कचरा (Sanitary Waste) और खतरनाक कचरा (Hazardous Waste) को अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य कचरे के बेहतर निस्तारण, पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा देना और लैंडफिल पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
अधिकारियों के मुताबिक, गीले कचरे में रसोई से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट जैसे भोजन के अवशेष, फल-सब्जियों के छिलके आदि शामिल होंगे। वहीं सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसी पुनर्चक्रण योग्य वस्तुएं रखी जाएंगी। सैनिटरी कचरे में डायपर, सैनिटरी पैड और अन्य व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े अपशिष्ट शामिल होंगे, जबकि खतरनाक कचरे में बैटरी, रसायन, बल्ब और अन्य विषैले पदार्थों को रखा जाएगा।
नगर निगम और स्वच्छता विभागों को इस नई व्यवस्था को लागू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग नए नियमों को समझ सकें और सही तरीके से कचरा अलग कर सकें। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन न करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाएगा। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि रीसाइक्लिंग उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। हालांकि, कुछ नागरिक संगठनों ने शुरुआती चरण में इसे आम जनता के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्वच्छता व्यवस्था पहले से ही कमजोर है।
स्थानीय निकायों का कहना है कि प्रारंभिक चरण में लोगों को प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि इस प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके। कई शहरों में स्कूलों, कॉलोनियों और सोसाइटी स्तर पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।
सरकार का मानना है कि यदि यह प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। यह कदम न केवल स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।