'कमरे की छत अचानक नीचे आ गिरी': दिल्ली हादसे में जिंदा बचे दो छात्रों का आपबीती में रो-रोकर छलका दर्द
‘भाई, मैं मर रहा हूं...’ ये पांच शब्द पांच मंजिला इमारत के मलबे में फंसे नीरज बावा ने अपने करीबी दोस्त वीर चतरथ से फोन पर कहे थे। रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन में हॉस्टल की इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। नीरज कई टन मलबे के नीचे दब गए। शरीर पर गंभीर चोटें थीं और सांस लेना भी मुश्किल होता जा रहा था। इसके बावजूद उन्होंने किसी तरह फोन कर अपने करीबियों को हादसे की जानकारी दी।
नीरज फिलहाल गंभीर हालत में AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। उनके कजिन रोहित छिब के मुताबिक, नीरज और उनके पास वाले कमरे में रहने वाले नितेश करीब चार घंटे तक मलबे में फंसे रहे। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।
नितेश ने पूछा- ‘भाई, पानी की आवाज आ रही है क्या?’
दिल्ली यूनिवर्सिटी के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सेकेंड ईयर के छात्र नितेश और नीरज हादसे के समय अपने-अपने कमरों में थे। नितेश रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे खाना खाने के बाद अपने कमरे में लौटे थे। तभी उन्हें दीवार की तरफ से पानी जैसी आवाज सुनाई देने लगी।
कुछ देर बाद आवाज तेज हो गई। नितेश ने पास वाले कमरे में रहने वाले नीरज से पूछा कि क्या उसे भी पानी की आवाज सुनाई दे रही है। नीरज ने भी आवाज सुनने की बात कही। इसके महज कुछ सेकेंड बाद ही पूरी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई।
नितेश के मुताबिक, वह मलबे के नीचे दब गए थे। उनके ऊपर लेंटर जैसा भारी मलबा आ गिरा था। हालांकि, मलबे और लेंटर के बीच थोड़ी जगह बन गई थी, जिससे उनका चेहरा उस खाली हिस्से में आ गया और वह सांस ले पा रहे थे। उनके पैर मलबे में फंसे हुए थे।
नीरज को आवाज दी तो बोले- ‘मुझे बहुत दर्द हो रहा है’
मलबे में फंसने के बाद नितेश ने अपने दोस्त नीरज को आवाज लगाई। नीरज ने जवाब देते हुए कहा कि उन्हें बहुत दर्द हो रहा है।
नितेश के मुताबिक, नीरज जिस जगह फंसे थे, वहां मलबा ज्यादा था और धूल भी भरी हुई थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। नितेश ने मलबे के अंदर से लगातार मदद के लिए आवाज लगाई।
कुछ देर बाद रेस्क्यू टीम मलबे के ऊपर पहुंची। नितेश ने बताया कि टीम के सदस्यों को यह कहते हुए सुना कि दूसरी बिल्डिंग के गिरने का भी खतरा है। इससे उनकी चिंता और बढ़ गई थी।
नीरज ने दोस्त को फोन कर कहा- ‘भाई, मैं मर रहा हूं’
इस बीच नीरज ने अपने करीबी दोस्त वीर चतरथ को फोन किया। वीर के मुताबिक, दोपहर करीब 1:45 बजे उनके पास नीरज का फोन आया। फोन उठाते ही नीरज ने कहा, ‘भाई, मैं मर रहा हूं।’
वीर ने बताया कि दोनों के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई। उन्होंने नीरज से लाइव लोकेशन भेजने को कहा। इसके बाद दोपहर करीब 1:55 बजे नीरज ने अपनी लाइव लोकेशन भेज दी।
करीब 2:16 बजे वीर ने दोबारा नीरज को फोन किया, लेकिन इस बार कोई जवाब नहीं मिला।
‘भाई, हिम्मत नहीं हारनी है तुझे’
नीरज की मदद के लिए उनके दोस्तों और करीबियों ने तुरंत घटनास्थल का रुख किया। पुलिस और NDRF की टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी थीं।
करीब तीन से चार घंटे की मशक्कत के बाद नीरज को मलबे से बाहर निकाला जा सका। इसके बाद उन्हें पहले प्राइमस अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब एक घंटे तक इलाज किया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें शाम करीब 6 बजे AIIMS ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
AIIMS में रात करीब 10:30 बजे नीरज की सर्जरी शुरू हुई, जो करीब रात 1 बजे तक चली।
नीरज की हालत गंभीर, एक सर्जरी हो चुकी
नीरज की हालत अभी गंभीर बताई जा रही है। उनकी पीठ में गंभीर चोटें आई हैं। जांघ के ऊपरी हिस्से और पेट में भी गहरे घाव बताए गए हैं। एक सर्जरी हो चुकी है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
परिजनों के मुताबिक, शरीर में संक्रमण फैलने की भी बात सामने आई है और डॉक्टर आगे एक और सर्जरी की तैयारी कर रहे हैं।
हादसे से पहले पड़ोसी गर्ल्स हॉस्टल में भी दिखीं दरारें
हादसे से कुछ मिनट पहले पास के ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राओं अर्निका और मानसी ने अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था।
दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में कमरे की दीवारों पर लंबी और गहरी दरारें दिखाई दे रही थीं। वीडियो में 20 वर्षीय अर्निका को यह कहते हुए सुना गया कि ‘लगता है गिरने वाली है।’
हादसे के बाद मलबे में तब्दील हुई पूरी इमारत
सत्य निकेतन में हॉस्टल की इमारत गिरने के बाद मौके पर मलबे का ढेर लग गया। रेस्क्यू टीम ने कई घंटे तक मलबा हटाकर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला। हादसे के बाद की तस्वीरों और वीडियो में पुलिस और NDRF की टीमें राहत एवं बचाव अभियान चलाती नजर आईं।
DU के साउथ कैंपस के पास है सत्य निकेतन
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इलाके के आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थान हैं।
छात्रों की बड़ी संख्या के कारण यहां दिनभर आवाजाही बनी रहती है। हालांकि, सत्य निकेतन में रहने वाले कुल छात्रों की संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।