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तेजस्वी यादव का एनडीए सरकार पर निशाना, बोले- अपनी विफलता छिपाने के लिए विपक्ष पर करती है दोषारोपण

 

पटना, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को विकास के मुद्दे पर बिहार की एनडीए सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि सरकार अपनी विफलता छिपाने के लिए विपक्ष पर दोषारोपण करती है। उन्होंने कई आंकड़ों का हवाला देते हुए चुनौती दी है कि मुख्यमंत्री, दो-दो उपमुख्यमंत्री में नैतिक साहस और योग्यता है तो इन आंकड़ों व तथ्यों पर मुझसे सार्वजनिक बहस करें।

उन्होंने प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि 21 वर्षों की एनडीए सरकार और 12 वर्षों की डबल इंजन सरकार में विगत दो दशकों से शिक्षा-रोजगार-आय, औद्योगिक विकास-उत्पादन और निवेश तथा स्वास्थ्य सेवा-सुविधा और पोषण से लेकर अधिकांश सामाजिक, मानवीय और आर्थिक संकेतकों में बिहार सबसे निचले पायदानों पर है।

तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार को सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य बताने पर भ्रष्ट शासकों को अपमान लगता है, क्योंकि यह उनके सफेद झूठ और अपार असफलता का पर्दाफाश कर उनकी सच्चाई को उजागर करता है, इसलिए एनडीए के कर्णधारों को यह असहनीय दर्द-पीड़ा होती है। बिहार की यह स्थिति 21 वर्षों से बनी हुई है। उन्होंने कहा कि देश में सबसे कम साक्षरता दर, कम प्रति व्यक्ति आय, सबसे कम किसानों की आय और सबसे कम प्रति व्यक्ति निवेश बिहार में है। यही नहीं, बिहार में सबसे कम प्रति व्यक्ति ग्रामीण आय और सबसे कम प्रति व्यक्ति बिजली खपत है, जबकि अपराध, गरीबी, और बेरोजगारी सबसे अधिक हैं और सबसे अधिक पलायन बिहार से होता है।

राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि सबसे अधिक युवा बेरोजगार बिहार में हैं, जबकि सबसे अधिक स्कूल ड्रॉप रेट भी इसी राज्य में है। बिहार में प्रति एक लाख आबादी पर सबसे कम कॉलेज हैं। उन्होंने विभिन्न आंकड़ों के जरिए बिहार की स्थिति को बदतर बताया।

उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण, औद्योगिक विकास-उत्पादन और निवेश में बिहार सबसे फिसड्डी है। राजद नेता ने आगे सवालिया लहजे में कहा, "बताओ, 21 वर्षों के शासन के बाद भी बिहार विकास के इन सभी संकेतकों में राष्ट्रीय औसत से अत्यधिक कम क्यों है?"

उन्होंने नसीहत देते हुए कहा, "जब तक आप समस्या को चिह्नित कर उसका समाधान नहीं करेंगे, तब तक अपनी असफलता छुपाने के लिए हर बार ऐसे ही चुनावों में चुनाव आयोग जैसी संस्था, भ्रष्ट अधिकारियों की चौकड़ी, सरकारी तंत्र का दुरुपयोग और मदद, 10 हजार नगद और एक करोड़ नौकरी और हर महिला को दो लाख रुपए बांटने जैसे सफेद झूठ बोलना पड़ेगा।"

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी