तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरा सम्पन्न कर पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया रवाना
जकार्ता, 8 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय विदेश दौरे का पहला चरण समाप्त कर दूसरे के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो गए हैं। उन्हें राष्ट्रपति प्रबोवा सुबियांतो ने एयरपोर्ट पर उन्हें विदा किया। ये दौरा काफी सफल माना जा रहा है। 'ब्रह्मोस' और 'अस्त्र' को लेकर हुए समझौते से दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी मजबूत हुई है।
इससे पहले पीएम योग्यकार्ता स्थित एक हजार साल पुराने प्रम्बानन मंदिर में पूजा अर्चना की। प्रम्बानन मंदिर पुनर्स्थापन परियोजना का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति सुबियांतो संग उद्घाटन किया।
इसके बाद अपने संबोधन में पीएम ने कहा, "ये मेरा सौभाग्य है कि कहीं न कहीं मुझे शिवजी के साथ जुड़ने का अवसर मिल ही जाता है। मेरा जन्म वडनगर में हुआ, वहां हाटकेश्वर महादेव एक बहुत बड़ा तीर्थ क्षेत्र है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में से सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ भी गुजरात की धरती पर है, और उसके विकास में भी मेरी सीधी जिम्मेदारी है। और मेरे राजनीतिक क्षेत्र काशी विश्वनाथ महादेव के आशीर्वाद भी निरंतर मुझ पर बने रहे हैं।"
उन्होंने विभिन्न पुनर्निर्माण परियोजनाओं से जुड़े रहने को भी अपनी किस्मत से जोड़ा। आगे कहा, "चाहे केदार धाम का पुनर्निर्माण हो, चाहे उज्जैन महाकाल का पुनर्निर्माण हो या आज यहां पर आकर करीब 1000-1200 साल पुरानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश की यादों से जुड़ी हुई हमारी सांस्कृतिक विरासत का पुनरुद्धार और उसका रिनोवेशन का काम प्रारंभ करने का सौभाग्य मुझे मिला। मैं इसके लिए अपने आप को बहुत बड़ा भाग्यशाली मानता हूं।"
प्रधानमंत्री मोदी की ये तीन दिवसीय यात्रा उपलब्धियों से परिपूर्ण रही है। इस दौरान दोनों देशों के बीच 20 समझौते हुए। इसमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल भुगतान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के कई समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और इंडोनेशिया समुद्री पड़ोसी होने के साथ-साथ रणनीतिक साझेदार भी हैं। दोनों नेताओं ने रक्षा और समुद्री सहयोग को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इसके साथ ही, दोनों देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग समझौते के जरिए रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का स्वागत किया।
समुद्री क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (एमडीए), समुद्री संपर्क, तटीय निगरानी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर), प्रदूषण नियंत्रण और खोज एवं बचाव (एसएआर) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं का मानना है कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करेगा।
--आईएएनएस
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