टेक्नोलॉजी और विश्वास मिलकर एनबीएफसी के अगले चरण की ग्रोथ को निर्धारित करेंगे : आरबीआई डिप्टी गवर्नर
नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मु ने गुरुवार को कहा कि देश की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) के पास ग्रोथ करने के काफी सारे अवसर मौजूद हैं, क्योंकि देश तेजी से आर्थिक विकास कर रहा है, जबकि शहरीकरण और डिजिटलीकरण में भी इजाफा हो रहा है। अगले चरण की ग्रोथ टेक्नोलॉजी और विश्वास से निर्धारित होगी।
7वें सीआईआई एनबीएफसी और एचएफसी समिट को संबोधित करते हुए, मुर्मु ने कहा कि भारत को विकसित, समावेशी और तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्था बनने के लिए एक मजबूत और विविध क्रेडिट सिस्टम बहुत जरूरी है।
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि एनबीएफसी सेक्टर की ग्रोथ में तीन कारक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, जिसमें वित्तीय समावेशन, सेक्टर विशिष्ट विशेषज्ञता और प्रोडक्ट डिजाइन एवं डिलीवरी में इनोवेशन शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि एनबीएफसी क्रेडिट नॉमिनल जीडीपी के लगभग 16.7 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जो एक साल पहले 15.9 प्रतिशत था, और यह शेड्यूल कमर्शियल बैंकों द्वारा दिए गए क्रेडिट का लगभग 27 प्रतिशत है, जो एक साल पहले 26 प्रतिशत था।
हालांकि, डिप्टी गवर्नर ने चेतावनी दी कि ग्रोथ के लिए अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड, एसेट क्वालिटी या ग्राहक सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे संस्थानों का दायरा और कामकाज जटिल होता जा रहा है, उन्हें अपनी नींव मजबूत करने की जरूरत है।
डिजिटलाइजेशन पर मुर्मु ने कहा कि टेक्नोलॉजी को संस्थागत जवाबदेही को कमजोर किए बिना बेहतर फैसलों में मदद करनी चाहिए। ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा और जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा और कामकाज में निरंतरता और मजबूती बनाए रखना जरूरी है।
मुर्मु ने आगे कहा कि टिकाऊ कारोबार के लिए ग्राहकों का भरोसा बहुत जरूरी है और इनोवेशन के लिए कमजोर या संवेदनशील ग्राहकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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