19 साल बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन, एयरपोर्ट पर समर्थकों ने किया स्वागत; वीडियो में बोलीं- 'वापस आकर बहुत अच्छा लगा'
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को करीब 19 साल बाद नई दिल्ली से कोलकाता पहुंचीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके समर्थकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान तस्लीमा ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया और कहा कि "वापस आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।"तस्लीमा नसरीन शनिवार, 1 अगस्त, को कोलकाता में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और प्रसिद्ध साहित्यकार शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
2007 में छोड़ना पड़ा था कोलकाता
तस्लीमा नसरीन को नवंबर 2007 में कोलकाता छोड़ना पड़ा था। उस समय उनकी आत्मकथा 'द्विखंडित' को लेकर कई इस्लामी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। प्रदर्शन हिंसक हो गए थे और पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी थी।विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें राज्य से बाहर भेज दिया था। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली लाया गया और बाद में वे विदेश चली गईं। तब से वे लंबे समय तक निर्वासन का जीवन जी रही हैं।
'लज्जा' से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
तस्लीमा नसरीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान उनके चर्चित उपन्यास 'लज्जा' से मिली। इस उपन्यास में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के कथित उत्पीड़न और सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण किया गया था।किताब के प्रकाशन के बाद कई कट्टरपंथी संगठनों ने इसका विरोध किया। इसके चलते तस्लीमा को लगातार धमकियां मिलीं और उन्हें अपने देश बांग्लादेश से भी निर्वासन का सामना करना पड़ा।
कार्यक्रम पर रहेगी नजर
तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी को साहित्यिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद उनकी मौजूदगी को लेकर समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। वहीं, शनिवार को होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम पर भी सभी की नजर रहेगी, जहां कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। तस्लीमा नसरीन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिला अधिकारों और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर अपने विचारों के लिए जानी जाती हैं। उनके लेखन और सार्वजनिक बयानों को लेकर समय-समय पर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले हैं।