तनिषा मुखर्जी ने कामाख्या के दरबार में टेका मत्था, उमानंद मंदिर में किया दर्शन
मुंबई, 19 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्र का शुभारंभ गुरुवार से शुरू हो गया है और इस पवित्र उत्सव का उत्साह पूरे देश में साफ दिखाई दे रहा है। तनिषा ने असम के प्रसिद्ध मां कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा की खूबसूरत झलकियां इंस्टाग्राम पर शेयर की।
तनिषा ने बताया कि इस आध्यात्मिक यात्रा को उन्होंने अपने करीबी दोस्त स्वाति और हरीश के साथ संपन्न किया।
पोस्ट की गई तस्वीरों में तनिषा मंदिर प्रांगण में अपने दोस्तों के साथ नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि तनिषा और उनकी दोस्त ने साड़ियां पहनी हुई हैं। दोनों बिना मेकअप के साधारण लुक मे साड़ी में खूबसूरत नजर आ रही हैं।
तनिषा ने लिखा, "श्री कामाख्या शक्तिपीठ की मेरी यात्रा बहुत शांतिपूर्ण और सुखद रही। मुझे यहां पर दिव्य आकर्षण और शांति का अनुभव हुआ। खास बात ये है कि गर्भगृह में हमें दो बार जाने का मौका मिला। वहां बैठकर हमने ध्यान किया और छोटी-सी पूजा अर्चना की, जिससे उन्हें बहुत अच्छा महसूस हो रहा है।"
अभिनेत्री ने आगे लिखा, "यह अनुभव इतना खास और पुण्यदायक था कि हम लगभग आखिरी फेरी से छूट ही जाते, जो पीकॉक द्वीप पर स्थित उमानंद मंदिर में की जाती है।"
तनिषा ने बताया कि उमानंद को कामाख्या का कालभैरव माना जाता है। इसलिए यहां के दर्शन जरूर करने चाहिए, वरना यात्रा अधूरी मानी जाती है। अभिनेत्री ने लिखा, "चूंकि उमानंद को कामाख्या का कलभैरव माना जाता है, इसलिए यह यात्रा वहां बिना पूरी नहीं होती। उमानंद मंदिर का शिवलिंग बहुत सुंदर है। अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं थी, लेकिन बाहर का नजारा और द्वीप की आध्यात्मिक ऊर्जा उन्हें हमेशा याद रहेगी।"
तनिषा ने अपनी पोस्ट में भारत की आध्यात्मिकता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत की यह दिव्य ऊर्जा हमें हमेशा एहसास दिलाती है कि हम कितने भाग्यशाली हैं।
बता दें कि असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित भारत के 51 शक्तिपीठों में से सबसे प्रमुख और प्राचीनतम (8वीं-9वीं शताब्दी) तांत्रिक सिद्धपीठ है। यहां माता सती का योनि भाग गिरने की मान्यता है, इसलिए यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं बल्कि एक प्राकृतिक योनि के आकार की शिला की पूजा होती है। यहां देवी की 'रजस्वला' अवस्था के दौरान जून में अंबुबाची मेला आयोजित होता है।
वहीं, उमानंद मंदिर गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के बीच पर स्थित उमानंद मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है, जो कामाख्या मंदिर के काफी करीब है। इस मंदिर को 'भस्माचल' कहा जाता है, जहाँ शिवजी ने कामदेव को भस्म किया था। यह स्थान तंत्र साधना और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है।
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