स्वदेशी तकनीक का ‘स्वावलंबन’ समुद्र में बढ़ाएगा नौसेना की ताकत
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस) भारतीय नौसेना के लिए 3,500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की आवश्यकता को (एओएन) मंजूरी दी जा चुकी है। यह नवाचार पहल के तहत हुआ है। इसके अंतर्गत भारतीय नवप्रवर्तकों से 4,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस प्रक्रिया में करीब 150 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और नवउद्यमों की भागीदारी रही है। सोमवार को नौसेना उप-प्रमुख, वाइस एडमिरल अजय कोचर ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 3,500 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की आवश्यकता को स्वीकृति दी गई है। वहीं 1,900 करोड़ रुपए से अधिक के अनुबंध किए जा चुके हैं। दरअसल भारतीय नौसेना अपनी युद्धक क्षमता को मजबूत बनाने और देश में विकसित अत्याधुनिक तकनीकों को समुद्र में इस्तेमाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है।
इसके तहत नौसेना का प्रमुख नवाचार और स्वदेशीकरण सम्मेलन ‘स्वावलंबन 2026’ का आयोजन 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में होगा। इस दो दिवसीय आयोजन में नौसेना, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और निवेशकों को एक मंच पर आने का अवसर मिलेगा।
नौसेना उप प्रमुख ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय प्रतिभाओं और देश में विकसित तकनीकों को नौसेना की वास्तविक परिचालन जरूरतों से जोड़ना है। इसके जरिए ऐसे स्वदेशी समाधान विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जिन्हें केवल प्रयोगशालाओं और परीक्षण केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय समुद्र में तैनात किया जा सके।
नौसेना ने स्पष्ट किया कि बदलती युद्ध तकनीकों के दौर में केवल नई तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह भी है कि उसे तेजी से परखा जाए, नौसेना की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाए और कम समय में इस्तेमाल के योग्य बनाया जाए। स्वावलंबन सम्मेलन का दायरा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। इस वर्ष सम्मेलन में 100 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल लगाए जाने की उम्मीद है। इस बढ़ती भागीदारी को भारत के रक्षा नवाचार क्षेत्र में बढ़ती रुचि के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सम्मेलन के जरिए नौसेना और देश के उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा स्वदेशी तकनीकों के विकास के लिए नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इस प्रयास में भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय, भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी और रक्षा नवाचार संगठन का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। इनके सहयोग से स्वावलंबन को देशभर की प्रतिभाओं, उद्योगों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों को जोड़ने वाले मंच के रूप में विकसित किया गया है।
नौसेना के मुताबिक मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि भारतीय उद्योग अब रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। स्वावलंबन के माध्यम से इस भागीदारी को और विस्तार देने तथा नई तकनीकों को वास्तविक सैन्य जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
इस बार सम्मेलन में केवल प्रतिभागियों और परियोजनाओं की संख्या बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं होगा, बल्कि जटिल और अत्याधुनिक तकनीकों पर भी चर्चा की जाएगी। इनमें क्वांटम आधारित प्रणाली, उच्च शक्ति वाली सूक्ष्म तरंग निर्देशित ऊर्जा प्रणाली, अत्यंत बड़ी स्वायत्त अंडर वॉटर प्रणाली और फिक्स विंग वाले विमानों के लिए स्वदेशी रैमजेट इंजन जैसी तकनीकें शामिल हैं।
विचार-विमर्श में उन बाधाओं पर चर्चा भी होगी, जो किसी उपयोगी तकनीक को आगे बढ़ाने में सामने आती हैं। इनमें साइबर सुरक्षा की कमजोरियां, आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियां और तकनीक के विकास एवं उत्पादन के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं। नौसेना का प्रयास है कि इस प्रक्रिया से उपयोगी तकनीकों को तैनाती के करीब लाया जाए। साथ ही, भारतीय कंपनियां उनके उत्पादन, रखरखाव और उन्नयन की क्षमता भी विकसित कर सकें।
--आईएएनएस
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