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सूरत के कपड़ा और प्लास्टिक उद्योग को सरकार का तोहफा, मंदी और युद्ध के बीच कस्टम ड्यूटी शून्य

 

सूरत, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। वैश्विक युद्ध की परिस्थितियों और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल और प्लास्टिक उद्योग को संजीवनी देने वाला बड़ा निर्णय लिया है।

सरकार ने पीटीए और एमईजी सहित 40 से अधिक प्रमुख पेट्रोकेमिकल कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 7.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है। यह रियायत आगामी तीन महीनों (अप्रैल, मई और जून) के लिए लागू रहेगी। सूरत के उद्योग जगत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक 'सकारात्मक बूस्ट' बताया है।

दक्षिणी गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने बताया कि युद्ध के कारण पिछले एक महीने में कच्चे तेल के दाम दोगुने हो गए हैं, जिससे यार्न की कीमतों में 30 प्रतिशत तक का उछाल आया था। कस्टम ड्यूटी शून्य होने से उत्पादन खर्च में 5 से 10 प्रतिशत की कटौती की संभावना है। उन्होंने कहा कि इसका असर दिखना शुरू हो गया है और यार्न उत्पादकों ने कीमतों में सात रुपए प्रति किलो तक की कमी की है, जो मैनमेड फाइबर उद्योग के लिए अच्छा संकेत है।

पॉलीमर बाजार के डायरेक्टर भाविन वोरा के अनुसार, एक से 10 मार्च के बीच कच्चे माल की कीमतें 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं, जिससे कई इकाइयां पुराने ऑर्डर पूरे करने में असमर्थ थीं। रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों ने पीईटी मटेरियल के दाम 5.5 रुपए तक घटा दिए हैं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई सेक्टर को बचाने के लिए यह सरकार का एक सराहनीय कदम है।

सूरत के यार्न व्यापारी प्रदीप पारिख ने सरकार के इस कदम का अभिनंदन करते हुए कहा कि यार्न की कीमतों में कमी आने से सूरत का छोटा और मध्यम उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। उन्होंने अनुमान जताया कि इस फैसले से यार्न मार्केट में 7 से 10 प्रतिशत तक का सीधा सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

कपड़ा कारोबारी और टेक्सटाइल यूथ ब्रिगेड के अध्यक्ष ललित शर्मा ने उद्योग की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि ईरान-अमेरिका तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से निर्यात ठप पड़ा है। ऐसे समय में यार्न की कीमतों में आई भारी तेजी ने वीवर्स की कमर तोड़ दी थी। उन्होंने सरकार के फैसले की तुलना 'बुझते दीये में तेल' से करते हुए कहा कि इससे न केवल कीमतें कम होंगी, बल्कि मंदी के दौर में व्यापारियों और बुनकरों को सांस लेने की जगह मिलेगी।

--आईएएनएस

एसडी/डीकेपी