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सूरत 2047 तक गुजरात की जीएसडीपी में 35 फीसदी से अधिक का योगदान देगा: सीएम पटेल

 

गांधीनगर, 1 मई (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को सूरत में तीसरी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) का भव्य शुभारंभ करते हुए साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से गुजरात ने वीजीआरसी का अभिनव दृष्टिकोण अपनाया है, ताकि राज्य का कोई भी क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे न रह जाए, साथ ही जिले की क्षमताओं को वैश्विक प्लेटफॉर्म भी मिले।

उन्होंने इससे पूर्व उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ रीजन में आयोजित दो वीजीआरसी की सफलता का संदर्भ देते हुए कहा कि समावेशी विकास की भावना के साथ विकसित भारत के लिए विकसित गुजरात का निर्माण करने के लिए रीजनल कॉन्फ्रेंस एक परफेक्ट प्लेटफॉर्म है।

उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण गुजरात रीजन की वीजीआरसी में सूरत सहित तापी, नवसारी, वलसाड, डांग और भरूच जिले की औद्योगिक विकास की क्षमताओं और संभावनाओं को अधिक वेग मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने सूरत इकोनॉमिक रीजन में केमिकल और फार्मा, टेक्सटाइल एंड अपैरल तथा जेम्स एंड ज्वेलरी, एग्रीकल्चर, रियल एस्टटे और टूरिज्म की निहित संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने यह भी कहा कि, इस अनुमान के साथ कि सूरत इकोनॉमिक रीजन 2047 तक बीस गुना वृद्धि के साथ गुजरात की जीएसडीपी में 35 फीसदी से अधिक का योगदान देगा, नीति आयोग के मार्गदर्शन में सूरत को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने का मास्टर प्लान मंजूर भी हो गया है।

सीएम पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे कॉरिडोर, नेशनल हाईवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, पोर्ट, एयरपोर्ट, बुलेट ट्रेन, मेट्रो रेल और आउटर रिंग रोड आदि से जुड़कर हवाई, जल और जमीनी कनेक्टिविटी के माध्यम से मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट वाला भारत का वेल-कनेक्टेड शहर बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने गुजरात राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर शुरू हुई दक्षिण गुजरात क्षेत्र की इस वीजीआरसी को प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य में 2001 के बाद हुए आमूल बदलाव और विकास के नए मील के पत्थर का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात में बंदरगाह-आधारित विकास सहित हुए निरंतर अप्रतिम विकास का जिक्र करते हुए कहा कि आज गुजरात अकेला देश के कुल कार्गो का 40 फीसदी हैंडलिंग करता है। इतना ही नहीं, गुजरात औद्योगिक उत्पादन (इंडस्ट्रियल आउटपुट) में 18 फीसदी और नवीकरणीय ऊर्जा में 15 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। राज्य सरकार का अपना कर राजस्व 9 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर 1.55 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

इसके अलावा, गुजरात ने इन ढाई दशकों में कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में बहुत बड़ी छलांग लगाई है। साणंद और धोलेरा सेमीकंडक्टर हब बन गए हैं। अब तक दो सेमीकंडक्टर प्लांट कार्यरत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात इन्वेस्टर्स समिट और प्रधानमंत्री के डेवलपमेंट विजन के परिणामस्वरूप गुजरात आज देश में सर्वाधिक रोजगार देने वाला राज्य बना गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्य का प्रत्येक जिला अपनी विशिष्ट संभावनाओं के साथ आगे बढ़ सके, इसके लिए करीब 20 प्रायोरिटी सेक्टर्स के साथ छह रीजनल इकोनॉमिक मास्टर प्लान तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विकसित भारत 2047 के लिए विकसित गुजरात 2047 का रोडमैप तैयार किया है। इसमें अर्निंग वेल, लिविंग वेल के ध्येय के साथ 2047 का गुजरात कैसा होगा, इसके लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इसकी विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, ईवी, ग्रीन हाईड्रोजन, और एआई जैसी फ्यूचरिस्टिक इंडस्ट्रीज के जरिए इन्वेस्टमेंट एंड एंप्लॉयमेंट, दोनों को बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री ने दक्षिण गुजरात की इस वीजीआरसी में सहभागी हो रहे उद्योग-व्यापार जगत के दिग्गजों से विकसित भारत के लिए विकसित गुजरात बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने दक्षिण गुजरात रीजन में सूरत जिले में 2, भरूच में 3, वलसाड में 1, तापी में 1 और नवसारी जिले में 1 सहित कुल 5380 एकड़ में आकार लेने वाले 8 नए ‘स्मार्ट जीआईडीसी’ औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की।

उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सभी नागरिकों को गुजरात स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ के आयोजन से सूरत और दक्षिण गुजरात के विकास को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। वाइब्रेंट गुजरात को क्षेत्रीय स्तर पर ले जाने के लिए अब राज्य के चार जोन में रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं।

संघवी ने वाइब्रेंट गुजरात की दो दशकों की सफलता के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए जोड़ा कि वर्ष 2003 में गुजरात की जीडीपी 1.29 लाख करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर वर्ष 2012-13 में 7.20 लाख करोड़ रुपए हो गई। प्रगति की इस यात्रा को जारी रखते हुए वर्ष 2022-23 में जीडीपी 21.90 लाख करोड़ रुपए और वर्ष 2025 के अंत तक 27.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। गुजरात आज देश की कुल जीडीपी में 8.2 प्रतिशत योगदान के साथ देश का ग्रोथ इंजन बन गया है। उन्होंने इस विकास यात्रा में उद्योगपतियों के अमूल्य योगदान की सराहना की।

--आईएएनएस

डीएससी